जिला परिवहन कार्यालय अररिया ने वाहनों के निबंधन प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा में गंभीर अनियमितताएं उजागर की हैं। 7 मार्च को आयोजित बैठक में दिए गए सख्त निर्देशों का डीलरों द्वारा खुलकर उल्लंघन किया जा रहा था, जिसके बाद अब कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। जांच में पाया गया कि कई डीलर अपूर्ण, गलत और अस्पष्ट दस्तावेज अपलोड कर रहे थे, जिससे रजिस्ट्रेशन में अनावश्यक देरी हो रही थी। सबसे गंभीर बात यह है कि एक ही आईपी एड्रेस से कई डीलरों के लॉगिन चल रहे थे, जो ‘क्रेडेंशियल का दुरुपयोग’ माना गया है। यह सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है और जांच टीम को इससे अवैध गतिविधियों की आशंका है। रजिस्ट्रेशन स्वीकृति मिलने से पहले ही गाड़ियां डिलीवर कर दी गईं इसके अलावा, वाहन बेचने के बाद ग्राहकों से पैसे लेने के बावजूद चालान और कर समय पर जमा नहीं किए जा रहे थे। कई मामलों में बिना हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) के वाहन ग्राहकों को सौंप दिए गए और रजिस्ट्रेशन स्वीकृति मिलने से पहले ही गाड़ियां डिलीवर कर दी गईं। कुछ मामलों में तो नंबर प्लेट जारी कर दी गई थी, जबकि रजिस्ट्रेशन अभी स्वीकृत ही नहीं हुआ था। ये सभी कृत्य मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 39, 41, 177, 192 तथा केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 का स्पष्ट उल्लंघन हैं। HSRP के वैधानिक नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। अब कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी जिला परिवहन पदाधिकारी ने सभी डीलरों को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अब कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीलरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी दस्तावेज पूर्ण, स्पष्ट और निर्धारित फॉर्मेट में ही अपलोड करें। हर डीलर अपना अधिकृत लॉगिन और अलग सिस्टम इस्तेमाल करे तथा एक ही आईपी से बहु-लॉगिन तुरंत बंद करे। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कर-चालान तत्काल जमा किए जाएं और बिना HSRP तथा रजिस्ट्रेशन स्वीकृति के कोई वाहन डिलीवर न किया जाए। डीलरों को 3 दिनों के अंदर एक आईपी-लॉगिन मामले का स्पष्टीकरण देना होगा और 5 दिनों के अंदर सभी लंबित व त्रुटिपूर्ण मामलों को सुधारना होगा। निर्धारित समय में निर्देश न मानने वाले डीलरों का लॉगिन तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा, भारी जुर्माना लगाया जाएगा, डीलरशिप निलंबित व रद्द करने की सिफारिश भेजी जाएगी और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीलर सिर्फ विक्रेता नहीं, बल्कि “रजिस्ट्रेशन फैसिलिटेटर” और “लीगल स्टेकहोल्डर” हैं जिला परिवहन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि डीलर सिर्फ विक्रेता नहीं, बल्कि “Registration Facilitator” और “Legal Stakeholder” हैं। उनकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। जिला प्रशासन ने सभी वाहन खरीदारों से अपील की है कि वे सतर्क रहें। गाड़ी लेते समय जरूर जांच करें जैसे HSRP नंबर प्लेट लगा हो , रजिस्ट्रेशन स्वीकृत हो, कर-चालान की वैध रसीद हो, किसी डीलर द्वारा नियम तोड़ने की सूचना तुरंत जिला परिवहन कार्यालय को दें। जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा, “नियमों की अवहेलना अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगी। दोषी पाए गए डीलरों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” यह मुहिम पारदर्शिता, सड़क सुरक्षा और जनहित को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है।
Source link