राष्ट्रपति भवन में महके जैसलमेर के पुलाव और गोविंद गट्टा:साउथ कोरिया के राष्ट्रपति को परोसा गया राजस्थान का 'गुलाब बाटी चूरमा'




राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष डिनर में राजस्थानी जायके के जरिए संस्कृति की छटा दिखाई गई। भारत आए साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के सम्मान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजकीय भोज की मेजबानी की। इस भोज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति ने शाम को गरिमाई किया। इस खास डिनर में मेहमानों को राजस्थान के विभिन्न हिस्सों के पारंपरिक और स्वादिष्ट खाने से रूबरू कराया गया। इस खास मेन्यू को तैयार करने का काम राजस्थान के शेफ डॉ. सौरभ शर्मा और उनकी टीम ने किया। उन्होंने गोविंद गट्टा, चांदी वाली दाल और गुलाब बाटी-चूरमा जैसे व्यंजन मेहमानों को राजस्थान की विविधता से रूबरू कराया। राजस्थानी खान का आनंद लेते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने शेफ और उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए कहा- ये शानदार राजस्थानी भोजन का अनुभव था। वहीं प्रेसिडेंट के सेक्रेट्री दीप्ति उमाशंकर ने डॉ. शेफ सौरभ और उनकी टीम को आयोजन में राजस्थानी पाक विरासत का प्रतिनिधित्व करने की उपलब्धि पर बधाई दी। साथ ही प्रयासों की सराहना करते हुए शुभकामाएं दी। वहीं शशि थरूर ने कहा- राजस्थानी भोजन शाकाहारी होने के साथ ही स्वादिष्ट था। खाने में यह रहा खास शेफ सौरभ और उनकी टीम के शेफ रविंद्र नरुका, शेफ हिम्मत सिंह, शेफ रतिराम प्रजापत और राष्ट्रपति भवन के एग्जीक्यूटिव शेफ मुकेश कुमार ने रॉयल थालियों में राजस्थानी फूड प्रस्तुत किया। जहां उन्होंने जैसलमेर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, जयपुर सहित रॉयल फैमिली के पारंपरिक व्यजनों को आधुनिक रूप से परोसा। इस खास मेन्यू में सभी डिशों ने मेहमानों का ध्यान खींचा। इसमें खास ज्वार के राब से लेकर गोविंद गट्टा, धुंगारी पालक मंगोड़ी, चांदी वाली दाल, जैसलमेरी पुलाव और गुलाब बाटी-चूरमा जैसे व्यंजनों ने मेहमानों को राजस्थान की विविधता से रूबरू कराया। वहीं खीरंद मालपुआ और घेवर जैसी मिठाइयों ने पारंपरिक मिठास का अनुभव कराया। डेढ़ महीने तक की एक-एक डिश पर तैयारी सफलता का श्रेय अपनी मां डॉ. उमा शर्मा और पत्नी डॉ. नेहा शर्मा को देते हुए शेफ सौरभ ने बताया- मेरे परिवार का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण था। इस विशेष मेन्यू को अंतिम रूप देने से पहले लगभग डेढ़ महीने तक गहन शोध किया और अनेक बार ट्रायल किए। उन्होंने राजस्थान की पारंपरिक रसोई, स्थानीय सामग्री और प्राचीन पाक विधियों का गहराई से अध्ययन किया, ताकि हर व्यंजन न केवल स्वाद में उत्कृष्ट हो, बल्कि उसकी प्रस्तुति में भी राजस्थान की असली पहचान झलके। इस दौरान कई बार अलग-अलग मिक्सिंग पर प्रयोग किए गए। इसके बाद प्रत्येक डिश को चयनित कर अंतिम मेन्यू में शामिल किया गया।



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