मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं के निर्यात में आई कमी और जूट के आयात में आ रही बाधाओं के बावजूद राज्य सरकार किसानों का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में इस वर्ष ‘डबल’ हुई पैदावार को देखते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से गेहूं उपार्जन का निर्धारित कोटा बढ़ाने की अपील की है, ताकि बंपर उत्पादन का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचाया जा सके। वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक परिदृश्य काफी जटिल है, जिसके कारण भारत से गेहूं का निर्यात लगभग न के बराबर हो रहा है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया के युद्ध जैसे हालातों के चलते विदेशों से आने वाले जूट की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इन विषम परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश सरकार ने किसानों का साथ नहीं छोड़ा है और वैकल्पिक तौर पर पॉली बैग्स (पीपी बैग) की व्यवस्था कर गेहूं की खरीदी सुचारू रूप से शुरू कर दी है। किसान संगठनों से चर्चा के बाद बनाई खरीद की रणनीति मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीदी को लेकर बताया कि किसान संगठनों के साथ विचार-विमर्श कर यह तय किया गया है कि उपार्जन केंद्रों पर सबसे पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाए। इसके बाद मध्यम श्रेणी के किसानों और फिर बड़े किसानों की फसल खरीदी जाएगी। सरकार ने इस साल गेहूं का समर्थन मूल्य ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जिस पर ₹40 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देकर कुल ₹2625 की दर से भुगतान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने पिछले कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि जब एमएसपी ₹2250 थी, तब भी सरकार ने ₹150 का बोनस दिया था और पिछले साल ₹175 बोनस के साथ ₹2600 में खरीदी की गई थी। उन्होंने विपक्ष और किसानों को आश्वस्त किया कि संकल्प पत्र में किए गए ₹2700 प्रति क्विंटल के वादे को आगामी तीन वर्षों के भीतर हर हाल में पूरा किया जाएगा। सीएम बोले- पिछले साल का गेहूं भंडारों में भरा मुख्यमंत्री ने इस बात को भी स्वीकार किया कि प्रदेश के गोदामों में पिछले साल का गेहूं अभी भी बड़ी मात्रा में रखा हुआ है, जो कि भंडारण की दृष्टि से एक चुनौती है। इसके बावजूद सरकार खरीदी काम को प्रभावित नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार भगवान की विशेष कृपा रही है और प्रदेश में गेहूं का उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का जो लक्ष्य (कोटा) मध्य प्रदेश को दिया गया है, वह इस भारी पैदावार के सामने कम पड़ सकता है। इसी कारण राज्य सरकार केंद्र से निरंतर संपर्क में है और उपार्जन का कोटा बढ़ाने का अनुरोध कर रही है ताकि प्रदेश के प्रत्येक पंजीकृत किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
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