जोधपुर एटीएस से जुड़े एक गंभीर मामले में आरोपी मोहम्मद अमार यासर को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत खत्म कर दी गई है। अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-3 (जोधपुर महानगर) देवेंद्र सिंह भाटी ने जमानत की जरूरी शर्तों के उल्लंघन पर आरोपी यासर की जमानत रद्द करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भले ही जमानत सर्वोच्च न्यायालय से मिली हो, लेकिन यदि शर्तों का उल्लंघन होता है, तो ट्रायल कोर्ट को उसे निरस्त करने का पूर्ण कानूनी अधिकार है। यह था मामला 2014 में राजस्थान एटीएस ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ संयुक्त ऑपरेशन करते हुए जयपुर और जोधपुर से प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) के राजस्थान मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। पाकिस्तानी आतंकी और IM ऑपरेटिव जिया-उर-रहमान उर्फ वकास ने इस पूरे मॉड्यूल को राजस्थान में बड़े आतंकी हमले की तैयारी के लिए प्रशिक्षित किया था। जोधपुर के प्रतापनगर थाने में दर्ज एफआईआर इसी प्रकरण से संबंधित है, जिसमें अभियुक्तों के ठिकानों से 50 किलो से ज्यादा विस्फोटक सामग्री, डेटोनेटर, इलेक्ट्रॉनिक टाइमर, सर्किट डायग्राम और बम बनाने की डायरी बरामद की गई थी। पूर्व में न्यायालय का निर्णय और यासर की भूमिका जयपुर के जिला एवं सेशन न्यायालय (महानगर-प्रथम) ने मार्च 2021 में इस मामले में 12 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिनमें मोहम्मद अमार यासर का नाम भी शामिल था। सभी दोषियों को देशद्रोह, UAPA और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था। जबकि, जोधपुर का यह अलग सेशन प्रकरण अभी भी अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-3, जोधपुर महानगर के समक्ष विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने दी थी जमानत, ट्रायल कोर्ट ने लगाई थी शर्तें झारखंड के धनबाद निवासी मोहम्मद अमार यासर पुत्र फिरोज को सर्वोच्च न्यायालय ने 3 मई 2024 को जमानत दी थी। उसी जमानत आदेश में दिए गए निर्देशानुसार, जोधपुर के ट्रायल कोर्ट ने 6 मई 2024 को जमानत की शर्तें तय की थीं। इसमें शर्त संख्या-2 के तहत आरोपी को पाबंद किया गया था, कि वह जमानत के दौरान किसी भी प्रकार के अपराध की पुनरावृत्ति नहीं करेगा। झारखंड में गिरफ्तारी और मोबाइल से मिले साक्ष्य आरोपी पर जमानत की शर्तों को तोड़ने का गंभीर प्रमाण तब मिला जब झारखंड एटीएस ने 26 अप्रैल 2025 को एक नया केस दर्ज किया और 30 अप्रैल 2025 को उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान उसके मोबाइल फोन से संदिग्ध सामग्रियां बरामद हुई हैं। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने स्वयं यह स्वीकार किया कि वह जमानत पर रिहा होने के बाद पुनः गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त रहा है। शर्त थी ‘अपराध नहीं दोहराएगा’ विशिष्ट लोक अभियोजक (एटीएस) दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि झारखंड के धनबाद निवासी मुल्जिम मोहम्मद अमार यासर को जमानत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ट्रायल कोर्ट ने 6 मई 2024 को जमानत की शर्तें तय की थीं, उनमें सबसे अहम थी- किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्तता नहीं होने की भी थी। लेकिन यासर ने इस शर्त का उल्लंघन किया। इस पर उसके खिलाफ ट्रायल कोर्ट में एटीएस की ओर से अपील की गई। सरकारी पक्ष द्वारा इससे संबंधित पुख्ता साक्ष्यों को कोर्ट के सामने रखा। संदर्भ मामलों का हवाला, सेशन कोर्ट की शक्ति सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु यह उठा कि क्या सेशन कोर्ट उस जमानत को रद्द कर सकता है जो देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा दी गई हो। इस पर कोर्ट ने विधिक दृष्टान्त का हवाला देते हुए व्यवस्था दी कि यदि ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो सेशन कोर्ट जमानत निरस्त करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी यासर के जमानत मुचलके जब्त करने और जमानत निरस्त करने के साथ ही उसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए तलब करने के आदेश दिए हैं। वर्तमान में आरोपी मोहम्मद अमार यासर रांची की सेंट्रल जेल में निरुद्ध है।
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