बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में बक्सर जिले की दो छात्राओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद टॉप-10 में जगह बनाई है। इनमें एक छात्रा के पिता गन्ने का जूस बेचते हैं, जबकि दूसरी के पिता एक जनरल स्टोर पर काम करते हैं। इन छात्राओं ने अपनी मेहनत और लगन से यह उपलब्धि हासिल की है। पुराना भोजपुर निवासी पूजा कुमारी ने मैट्रिक परीक्षा में पूरे बिहार में 10वां स्थान प्राप्त किया। जिले में वह छठे और अनुमंडल स्तर पर पहले स्थान पर रहीं। पूजा के पिता बीरबल चौधरी पुराना भोजपुर चौक पर गन्ने का जूस बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने के बावजूद पूजा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनके पिता को सुनने में भी परेशानी है, लेकिन उन्होंने बेटी की शिक्षा का पूरा समर्थन किया। सेल्फ स्टडी से मिली सफलता
पूजा ने बताया कि उन्होंने अपनी सफलता के लिए सेल्फ स्टडी पर अधिक भरोसा किया और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। परीक्षा में उन्हें हिंदी में 96, संस्कृत में 90, गणित में 99, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान में 78-78 तथा अंग्रेजी में 85 अंक मिले। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी पूजा ने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया है। कुछ साल पहले उनके छोटे भाई गौतम की डूबने से मृत्यु हो गई थी, जिससे परिवार को गहरा सदमा लगा था। स्कूल बदलने के बाद भी जारी रखी पढ़ाई
पूजा की प्रारंभिक शिक्षा संत जोसेफ हाई स्कूल में हुई थी। स्कूल की मान्यता रद्द होने के बाद उन्हें उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पुराना भोजपुर में दाखिला लेना पड़ा, जहाँ से उन्होंने दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों और माता-पिता को देती हैं। पूजा का सपना सिविल सेवा में जाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। सिमरन कुमारी ने हासिल किया 9वां स्थान
वहीं दूसरी ओर, बक्सर नगर पंचायत के वार्ड संख्या सात की रहने वाली सिमरन कुमारी ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे बिहार में नौवां स्थान हासिल किया है। सिमरन ने 482 अंक यानी 96.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर टॉप-10 में जगह बनाई, जबकि जिले में वह पांचवें स्थान पर रही। पिता जनरल स्टोर में करते हैं काम
सिमरन एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता सोनू माली एक जनरल स्टोर में काम करते हैं और उसी से परिवार का खर्च चलाते हैं। परिणाम घोषित होने के बाद उनके घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। उनकी माता साक्षी देवी और दादी तेतरी देवी बेटी की सफलता पर बेहद खुश नजर आईं। नियमित पढ़ाई और समय प्रबंधन बना सफलता का राज
सिमरन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और कोचिंग संस्थान “आदि क्लासेज” को दिया। उसने बताया कि परिवार ने कभी पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया, बल्कि हमेशा सहयोग और प्रोत्साहन दिया। नियमित पढ़ाई और समय का सही उपयोग ही उसकी सफलता का राज रहा। भविष्य में डॉक्टर बनने का सपना
भविष्य को लेकर सिमरन का सपना है कि वह मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाए और नीट परीक्षा पास कर डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करे। इन दोनों बेटियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
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