पंजाब की अनाज मंडियों में गेहूं की आवक चरम पर है। हालांकि, कस्बा बधनी कलां की मुख्य दाना मंडी में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मंडी में गेहूं की बोरियों के अंबार लग गए हैं, जिससे आढ़तियों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी खरीद के बावजूद लिफ्टिंग की धीमी गति ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय किसानों और आढ़तियों के अनुसार, सरकार ने 72 घंटों के भीतर लिफ्टिंग पूरी करने का दावा किया था। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। मंडी में गेहूं की बोरियां कई दिनों से जमा हैं, जिससे जगह की कमी हो रही है और फसल की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। जरूरत से कम लगाई गईं गाडि़यां आढ़तियों ने बताया कि परिवहन व्यवस्था कमजोर है। लिफ्टिंग के लिए आवश्यक ट्रकों की तुलना में बहुत कम वाहन भेजे जा रहे हैं। इसी कारण गेहूं के उठान में देरी हो रही है, जिससे मंडी का पूरा प्रबंधन प्रभावित हो रहा है।इलाके के किसानों और यूनियन नेताओं ने प्रशासन से तत्काल ट्रकों की संख्या बढ़ाने और लिफ्टिंग प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है। समस्यायों के त्वरित समाधान के लिए लगाएं विशेष टीमें उन्होंने यह भी मांग की है कि विशेष टीमें तैनात की जाएं, ताकि खरीद एजेंसियों के अधिकारी मौके पर ही समस्याओं का समाधान कर सकें।मौजूदा हालात को देखते हुए, आढ़तियों ने सरकार और खरीद एजेंसियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उनका स्पष्ट कहना है कि 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद फसल की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी।
Source link