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गुना के चौधरी मोहल्ला स्थित जैन मंदिर ट्रस्ट के संविधान संशोधन को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। संशोधन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरतने और पहले से दर्ज आपत्तियों की अनदेखी के आरोप लगाए जा रहे हैं। मुनि सुब्रतनाथ जिनालय समिति के सदस्य तरुण जैन के अनुसार ट्रस्ट के संविधान संशोधन का प्रस्ताव पहली बार 27 फरवरी 2024 को एसडीओ गुना न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि 20 दिसंबर 2024 को इस प्रस्ताव को बिना स्पष्ट कारण के वापस कर दिया गया, जबकि पहले से दर्ज आपत्तियों का उल्लेख भी प्रक्रिया में शामिल था। जानकारी के मुताबिक, 8 फरवरी 2024 को ही मुनि सुब्रतनाथ जिनालय की ओर से आपत्ति दर्ज कर दी गई थी, जो संशोधन फाइल का हिस्सा भी थी। इसके बावजूद आरोप है कि बाद की प्रक्रिया में इन आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। दूसरे संशोधन पर विवाद
आरोप है कि 16 जनवरी 2026 को प्रस्तुत दूसरे संशोधन प्रस्ताव में न्यायालय को यह जानकारी नहीं दी गई कि पहले से आपत्तियां लंबित हैं। विरोध पक्ष का कहना है कि यह जानकारी छिपाई गई, जबकि इसे पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। इसी आधार पर संजय कामिनी के इस बयान पर भी सवाल उठ रहे हैं कि ट्रस्ट को कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। वहीं ट्रस्ट पंजीयन क्रमांक 9 बी 113/66-67 के अनुसार यह एक ही जैन मंदिर ट्रस्ट है और इसमें अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष सदस्य ही होते हैं तथा चुनाव ट्रस्ट व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए। 1966 के बाद से नहीं हुआ संशोधन
बताया गया है कि वर्ष 1966 के बाद ट्रस्ट में कोई संशोधन नहीं हुआ। इसके बावजूद वर्तमान प्रक्रिया को लेकर वैधानिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही आरोप है कि 21 सितंबर 2021 के बाद से ट्रस्ट में चुनाव नहीं कराए गए, जिससे पारदर्शिता और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर विवाद उत्पन्न हो गया है।
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