सीकर में अवैध खनन जारी:ड्रोन मैपिंग से खुलासा; 13 खदानों से निकाला 1.28 करोड़ टन पत्थर, रिकॉर्ड में 61 लाख टन ही




राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर मीणा की नांगल में बेतहाशा अवैध खनन किया जा रहा है। भास्कर ने माइनिंग एक्सपर्ट किशोर कुमावत को साथ लेकर अवैध खनन पर पड़ताल की। 13 हैक्टेयर में सबसे बड़े पिट में एक-एक हैक्टेयर की 13 खदानें हैं। इनकी गहराई 70 से 95 मीटर पहुंच चुकी है। जहां कभी 20 मीटर ऊंची पहाड़ी थी, वहां अवैध खनन के कारण गड्ढे बन चुके हैं। इन 13 खदानों से 2003 से अब तक 1.28 करोड़ टन पत्थर निकाला गया है, जबकि विभागीय रिकॉर्ड में मात्र 61.74 लाख टन खनिज दिखाया गया है। इस तरह 66.36 लाख टन का अवैध खनन हुआ है। 200 रुपए प्रति टन के हिसाब से इसकी कीमत 132 करोड़ रुपए होती है। ये अधिकारी जिम्मेदार 2014 से पहले खनन विभाग का कार्यालय सीकर में था, तब जेपी जाखड़ माइनिंग इंजीनियर थे। 2014 में कार्यालय नीमकाथाना गया, जहां अनिल गुप्ता सहायक खनिज अभियंता बने। बाद में मनोज शर्मा, धरम सिंह मीना और अमीचंद दुहारिया ने भी जिम्मेदारी संभाली। खनन पट्टा सं-102/2002 खनन पट्टा सं-71/2002 खनन पट्टा सं-63/2002 खनन पट्टा सं-104/2002 खनन पट्टा सं-72/2002 खनन पट्टा सं-103/2002 खनन पट्टा सं-69/2002 खनन पट्टा सं-66/2002 खनन पट्टा सं-67/2002 खनन पट्टा सं-65/2002 खनन पट्टा सं-64/2002 खनन पट्टा सं-70/2002 खनन पट्टा सं-68/2002 ड्रोन सर्वे में सामने आया अवैध खनन का सच 13 हैक्टेयर में किए गए सर्वे में खनन पिट की गहराई और खनिज वॉल्यूम की वैज्ञानिक तरीके से गणना की गई। 31 स्थानों पर डीजीपीएस डिवाइस से पॉइंट लिए गए। इनसे प्राप्त कोऑर्डिनेट्स और एलिवेशन डेटा के आधार पर सटीक मैपिंग संभव हुई। ड्रोन से 600 तस्वीरें ली गईं। इन्हें सॉफ्टवेयर की मदद से जोड़कर इमेज तैयार की गई। इसी से डिजिटल टेरेन मॉडल और डिजिटल सरफेस मॉडल बनाए गए। इस तरीके से मापा अवैध खनन प्रत्येक खदान की केएमएल फाइल के आधार पर लीज सीमा तय की गई। एसआरटीएम और जीटी शीट के एलिवेशन डेटा के साथ ड्रोन सर्वे से प्राप्त आंकड़ों को मिलाकर एमआरएल निर्धारित किया गया। “खान मालिकों से ड्रोन सर्वे रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट की जांच करने के बाद अवैध तरीके से निकाले चेजा पत्थरों का आकलन हो सकेगा। गड़बड़ी पर कार्रवाई होगी।” -अशोक वर्मा, एएमई, नीमकाथाना



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