Chhindwara Accident: Kareer Village Mourning


छिंदवाड़ा में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम (26 मार्च) से लौटते वक्त हुए दर्दनाक सड़क हादसे को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ा अब भी उतनी ही ताजा है। गांव करेर और भंडारकुंड में मातम का माहौल है। रविवार को तीसरे दिन की रस्में पूरी हुईं, लेकिन जैसे ही अस

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हादसे में जान गंवाने वाले 10 लोगों में से 5 इसी गांव के थे, जिनमें 3 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं। इस हादसे ने कई परिवारों को पूरी तरह उजाड़ दिया है। कहीं घर का सहारा छिन गया तो कहीं अकेले बुजुर्ग और बच्चे रह गए।

जिन घरों में चूल्हा तक नहीं जला, वहां पड़ोसी सहारा बनकर खड़े हैं। हर आंगन में सिर्फ दर्द, सन्नाटा और अपनों के लौट आने की बेबस उम्मीद नजर आ रही है।

दैनिक भास्कर की टीम ने करेर गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों का दर्द जाना…

हादसे के पांच दिन बाद भी माहौल बेहद गमगीन

छिंदवाड़ा के करेर और भंडारकुंड गांव में हादसे के पांच दिन बाद भी माहौल बेहद गमगीन है। रविवार को तीसरे दिन की रस्में पूरी की गईं। दूर-दराज के रिश्तेदार लगातार गांव पहुंच रहे हैं। जैसे ही वे घरों में आते हैं, महिलाएं फूट-फूटकर रोने लगती हैं। कई घरों में चार दिन से चूल्हा नहीं जला है और पड़ोसी खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं।

शीताली ने 9वीं तक पढ़ाई की है। उनके पिता और भाई की पहले ही मौत हो चुकी है।

शीताली ने 9वीं तक पढ़ाई की है। उनके पिता और भाई की पहले ही मौत हो चुकी है।

सिया इवनाती के घर में सिर्फ दादी और बेटी बची

हादसे में जान गंवाने वाली सिया इवनाती के घर में अब सिर्फ 17 साल की बेटी शीताली और दादी कुंडीबाई बची हैं। शीताली कहती हैं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा। घर के अंदर जाने का मन नहीं करता और ऐसा लगता है कि जिंदगी में सब खत्म हो गया।

शीताली के मुताबिक, परिवार के पास तीन एकड़ खेत है, लेकिन उससे गुजारा नहीं होता था। इसलिए माता-पिता खेती के साथ-साथ मजदूरी भी करते थे।

ये शीताली की दादी कुंडीबाई हैं। अब ये और शीताली घर में अकेली बची हैं।

ये शीताली की दादी कुंडीबाई हैं। अब ये और शीताली घर में अकेली बची हैं।

पिता की मौत के बाद मां ने परिवार को संभाला

साल 2019 में पिता की करंट लगने से मौत हो गई थी। उस समय शीताली सिर्फ 10 साल की थीं। इसके बाद मां ने परिवार संभाला, लेकिन 2023 में छोटे भाई की भी एक्सीडेंट में मौत हो गई।

भाई की मौत के बाद मां काफी टूट गई थीं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला। घर की हालत देखकर शीताली ने 9वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और मां के साथ मजदूरी करने लगीं।

शीताली की मां के शव के पास रोते दूर के रिश्तेदार और पड़ोसी।

शीताली की मां के शव के पास रोते दूर के रिश्तेदार और पड़ोसी।

सिया इवनाती ने शीताली को भी साथ चलने को कहा था

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जाने के लिए गांव में पहले से तैयारी चल रही थी। पंचायत सचिव बस लेकर आया और कई ग्रामीणों के साथ शीताली की मां भी चली गईं। मां ने शीताली को भी साथ चलने को कहा, लेकिन दादी के कारण वह नहीं गई।

रात में हादसे की खबर आई और अगले दिन मां का शव घर पहुंचा। शीताली कहती हैं कि अभी मां को गए कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन घर के बाहर देखकर ऐसा लगता है कि वे अभी लौट आएंगी।

गांव के अन्य मृतकों के घर भी आसपास ही हैं। यही हाल मृतक शकुन यादव के परिवार का है। वे आंगनवाड़ी सहायिका थीं। पति की मौत हो चुकी है। 30 साल के बेटे रामभरोसे अविवाहित हैं।

तीसरी मृतक भागवंती विश्वकर्मा सरकारी स्कूल में खाना बनाती थीं। पिता दान सिंह खेती और बेटा बृजलाल मजदूरी करते हैं। मृतक रामदास पराने और दौलत फरकाडे के परिवार के आर्थिक स्थिति ठीक बताई जा रही है।

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मध्यप्रदेश-CM के कार्यक्रम से लौट रही बस पलटी

छिंदवाड़ा के पुलिस लाइन में आयोजित हितग्राही सम्मेलन से लौट रही बस सिमरिया के पास पिकअप वाहन से टकरा गई।

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छिंदवाड़ा जिले में पिकअप वाहन से आमने-सामने की टक्कर के बाद बस पलट गई। हादसे में दोनों गाड़ियों के ड्राइवर समेत 10 लोगों की मौत हो गई। 30 से ज्यादा घायल हुए हैं। एक महिला और एक बच्चे का हाथ कटकर अलग हो गया। कुछ यात्रियों के सिर फूटे हैं। पढ़ें पूरी खबर…



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