यूआईटी भीलवाड़ा लॉटरी पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख:अंतरिम स्थगन आदेश हुआ स्थायी, 90,000 आवेदकों को न्याय की उम्मीद

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राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की खंडपीठ (माननीय डॉ. न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं माननीय न्यायमूर्ति संदीप शाह) ने डी.बी. सिविल रिट पिटिशन संख्या 21943/2025 (एडवोकेट हेमेंद्र शर्मा, राघव कोठारी, पवन त्रिपाठी बनाम राज्य सरकार) सहित इससे संबद्ध डी.बी. सिविल रिट पिटिशन संख्या 22129/2025 एवं 22673/2025 (नवीन शर्मा बनाम राज्य सरकार) की सुनवाई 27 मार्च 2026 को की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नमन मोहनोट एवं अधिवक्ता रवि पंवार ने यूआईटी भीलवाड़ा की प्लॉट आवंटन प्रक्रिया में हुई गंभीर अनियमितताओं, पारदर्शिता के अभाव तथा वैधानिक नियमों के उल्लंघन को विस्तार से न्यायालय के समक्ष रखा। न्यायालय ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए कई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न निर्धारित किए, जिनमें बिना प्रमाणित एवं गैर-ऑडिटेड सॉफ्टवेयर के माध्यम से लॉटरी संचालन, एक ही PAN पर एकाधिक आवंटन, आरक्षण नियमों में विसंगतियां, एक ही परिवार को बार-बार लाभ, अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों को अनुचित लाभ, राजस्थान इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (डिस्पोजल ऑफ अर्बन लैंड) नियम, 1974 का उल्लंघन तथा लॉटरी से पूर्व परिणाम अपलोड जैसे अत्यंत गंभीर मुद्दे शामिल रहे। प्रकरण में एडवोकेट द्वारा अंतिम बहस को आगे बढ़ाने हेतु समय चाहा गया, जिस पर कोर्ट ने मामले को अगली तारीख के लिए लिस्टेड किया। हाईकोर्ट ने स्टे याचिका का निस्तारण करते हुए पूर्व में 11.11.2025 को पारित अंतरिम स्थगन आदेश को स्थायी (Absolute) करते हुए स्पष्ट किया कि उक्त आदेश यथावत प्रभावी रहेगा। इससे स्पष्ट है कि संबंधित आवंटन प्रक्रिया पर रोक जारी रहेगी। न्यायालय द्वारा इतने व्यापक एवं गंभीर प्रश्न निर्धारित किया जाना यह संकेत देता है कि मामला केवल तकनीकी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर जनहित से जुड़ा हुआ है। लगभग 90,000 आवेदकों के हित इस प्रकरण से सीधे प्रभावित हैं, ऐसे में न्यायालय का यह रुख पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।मामले की अगली सुनवाई 08 अप्रैल 2026 को होगी।

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