डिंडौरी जिले की ग्राम पंचायत नारायण डीह का एक मनरेगा मजदूर मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा। पीड़ित मजदूर संजू पिता भुरकू ने बताया कि पिछले चार साल से उसकी मेहनत की कमाई किसी दूसरे के खाते में जमा हो रही है। इस आर्थिक तंगी के कारण उसे अपने परिवार के साथ जिले से बाहर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। जॉबकार्ड और बैंक खाते के बावजूद नहीं मिली मजदूरी बासी देवरी निवासी संजू और उनकी पत्नी मनरेगा के तहत मजदूरी करते थे। संजू ने बताया कि वर्ष 2022 तक मजदूरी उसके पंजाब नेशनल बैंक के खाते में नियमित आती थी, लेकिन उसके बाद अचानक बंद हो गई। सचिव और रोजगार सहायक से कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ और उसे काम छोड़ना पड़ा। सीएम हेल्पलाइन की शिकायत बंद कराई मजदूर ने आरोप लगाया कि उसने दो बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने दबाव बनाकर और ओटीपी लेकर उसकी शिकायत बंद करवा दी। पैसे के अभाव में संजू के बेटे भुवनेश्वर का स्कूल दाखिला भी एक साल पिछड़ गया। त्योहार पर घर लौटने के बाद पीड़ित न्याय की उम्मीद में जिला पंचायत सीईओ के पास पहुंचा। आधार लिंक खाते की जानकारी में उलझा मामला जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर जनपद पंचायत के एपीओ भोजराज परस्ते ने एसबीआई बैंक के नाम एक पत्र जारी कर आधार नंबर 44052140326 से लिंक खाते का स्टेटमेंट मांगा। पत्र में 17,406 रुपए की राशि का उल्लेख था, लेकिन बैंक ने स्पष्ट किया कि इस आधार नंबर से कोई खाता लिंक नहीं है। मामले में एपीओ ने मजदूर पर ही समय पर सूचना न देने का आरोप लगाया है, जबकि अब विस्तृत जांच की बात कही जा रही है।
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