जोधपुर रेल मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। मंडल ने 2734 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया। इस बेहतरीन परफॉर्मेंस का इनाम रेलवे बोर्ड ने आगामी साल के लिए 6000 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट देकर दिया है। जोधपुर डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया- दो से ढाई हजार करोड़ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन बोर्ड ने उनकी अपेक्षा से लगभग तीन गुना ज्यादा फंड आवंटित किया है। यह बजट जोधपुर मंडल के रेल विकास और यात्री सुविधाओं के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा। राजस्व: उत्तर पश्चिम रेलवे की माल ढुलाई में 35% हिस्सेदारी जोधपुर मंडल ने इस साल कमाई के हर मोर्चे पर लक्ष्य को पार किया है। माल ढुलाई से 1456 करोड़ रुपये की आय हुई है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 11% अधिक है। मंडल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि पूरे उत्तर पश्चिम रेलवे के कुल माल राजस्व का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा अकेले जोधपुर मंडल से आ रहा है। इसके साथ ही यात्री सेवाओं से 940 करोड़ रुपये की आय हुई है। मंडल का ‘परफॉर्मेंस एफिशिएंसी इंडेक्स’ 60.55% रहा है, जो पिछले दस वर्षों में सबसे शानदार आंकड़ा है। बजट: नई लाइनों और डबलिंग पर मेगा इन्वेस्टमेंट 6000 करोड़ रुपये के बजट में सबसे बड़ा हिस्सा आधारभूत संरचना और नई रेल लाइनों के लिए रखा गया है। भटिंडा-भीलड़ी डबल लाइन प्रोजेक्ट के लिए एकमुश्त 7522 करोड़ रुपये का कुल बजट मंजूर किया गया है, जो इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। नई रेल लाइनों के मोर्चे पर पुष्कर-मेड़ता लाइन के लिए 800 करोड़ रुपये का पूरा बजट एक साथ मंजूर हुआ है, जिससे काम में तेजी आएगी। इसके अलावा रामदेवरा-पोकरण नई लाइन के लिए 189 करोड़ और माणकलाव को ब्लॉक स्टेशन व गुड्स शेड बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सुरक्षा और तकनीक: 431 करोड़ से अभेद्य बनेगा ‘कवच’ रेलवे सुरक्षा और आधुनिक तकनीक पर इस बार विशेष जोर दिया गया है। ट्रेनों की भिड़ंत रोकने वाली ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली के लिए इस साल 431 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, जो पिछले साल के 80 करोड़ के मुकाबले पांच गुना से भी अधिक है। इसके अलावा पटरी नवीनीकरण पर 1950 करोड़ और सिग्नल व टेलीकॉम कार्यों पर 730 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। गुढ़ा स्टेशन के पास 64 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक भी तैयार किया जा रहा है, जिस पर 220 किमी/घंटा की रफ्तार से ट्रेनों का परीक्षण हो सकेगा। मेगा हब और डिजिटल सुविधाएं: बदल जाएगी स्टेशनों की सूरत भविष्य की परियोजनाओं में 397 करोड़ रुपये की लागत से भगत की कोठी को मेगा रेलवे हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां प्लेटफॉर्म संख्या 3 से 6 तक का निर्माण होगा। साथ ही 167 करोड़ का वंदे भारत स्लीपर डिपो और 195 करोड़ का ट्रेनिंग सेंटर निर्माणाधीन है। जोधपुर स्टेशन का 474 करोड़ रुपये से पुनर्विकास कार्य जारी है। यात्री सुविधाओं के तहत बाड़मेर, मेड़ता रोड और जैसलमेर जैसे स्टेशनों पर नई लिफ्ट लगाई गई हैं और डिजिटल लॉकर की शुरुआत की गई है। ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते और कबाड़ से रिकॉर्ड कमाई रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत 80 बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बचाया है। वहीं रेलवे ने स्मार्ट वित्तीय प्रबंधन का उदाहरण पेश करते हुए खाली खड़े इंजनों को शटडाउन कर 3.09 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत की है। स्टोर्स विभाग ने रिकॉर्ड 15,922 मीट्रिक टन कबाड़ बेचकर 55.93 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। सोलर प्लांट के जरिए सालाना 10.8 लाख यूनिट बिजली बचाकर रेलवे पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहा है।
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