जीतनराम मांझी के घर से 1.5km दूर लगी आग:गयाजी में 300 बीघा गेहूं की फसल राख, एक घंटे से आग बुझा रही फायर ब्रिगेड




गयाजी में आज दोपहर अचानक आग गई। देखते ही देखते सैकड़ों किसानों की मेहनत और सपने को आग ने राख कर दिया। घटना अतरी विधानसभा के सरबहदा थाना क्षेत्र के नैली गांव की है। बता दें कि आग केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के घर से डेढ़ किलोमीटर दूर लगी है। जिसे एक घंटे से फायर ब्रिगेड की टीम बुझा रही है। अबी तक आग नहीं बुझी है। हालात ऐसे बने कि गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग बाल्टी, जार, पाइप से आग बुझाने में जुट गए। लेकिन आग इतनी तेज थी कि किसी के काबू में नहीं आई। हवा के साथ आग इस खेत से उस खेत फिर अगले खेत मे पहुंच रही है। गति भी काफी तेज है। गांव के करीब 1000 बीघा में गेहूं की फसल लगी। इनमें से अब तक करीब 300 बीघा फसल जलकर पूरी तरह राख हो चुकी है। आग अभी भी कई हिस्सों में सुलग रही है और फैलने का खतरा बना हुआ है। अब तक 60 लाख का नुकसान हो चुका है। 200 घरों के किसान प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि आग अचानक खेत के एक हिस्से से उठी और हवा के साथ तेजी से फैलती चली गई। कुछ ही मिनट में कई खेत इसकी चपेट में आ गए। गांव के करीब 200 घरों के किसान इस आग से प्रभावित हुए हैं। दो घंटे बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंची आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों से भी लोग दौड़े कर चले आए। घंटों तक ग्रामीण खुद आग बुझाने में लगे रहे। लेकिन जब तक फायर ब्रिगेड पहुंचती, तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे। गांव के सूरजभान सिंह और धीरज सिंह ने बताया कि सूचना देने के करीब दो घंटे बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंची। तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। फिलहाल मौके पर तीन गाड़ियां आग बुझाने में लगी हैं, जबकि गया और बोधगया से दो और गाड़ियां मंगाई गई हैं। 40 से ज्यादा किसानों की फसल राख इस आग में राहुल कुमार, जितेंद्र कुमार, सत्येंद्र कुमार, पवन कुमार, विनीत सिंह समेत करीब 40 किसानों की फसल पूरी तरह जल गई है। खेतों में खड़ी कनक सरीखे सुनहरी फसल अब काली राख में बदल चुकी है। साल भर की उम्मीद भी खत्म हुई पीड़ित किसानों का कहना है कि यह सिर्फ फसल नहीं जली, बल्कि उनकी सालभर की उम्मीद भी खत्म हो गई। अब घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। कई किसानों ने कहा कि अगर समय पर फायर ब्रिगेड पहुंच जाती तो नुकसान इतना बड़ा नहीं होता। नुकसान का आंकड़ा 60 लाख के पार पीड़ित राहुल कुमार के मुताबिक करीब 300 बीघा में 50 से 60 लाख रुपए की फसल जल गई है। इतनी बड़ी तबाही ने गांव की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है। यह इलाका पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के गांव महकार से सटा हुआ है। घटना स्थल उनके घर से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। आग लगने की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। किसानों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं- किसी की लापरवाही या फिर जानबूझकर आग लगाने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सरबहदा थाना अध्यक्ष निशा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। फिलहाल प्राथमिकता आग पर काबू पाने की है। आग लगने के कारणों की जांच बाद में की जाएगी। गांव में अब एक ही मांग उठ रही है कि किसानों को मुआवजा मिले। किसानों का कहना है कि सरकार तत्काल नुकसान का आकलन कर मुआवजा दे, नहीं तो हालात और बिगड़ेंगे। फिलहाल दमकल की टीमें आग बुझाने में जुटी हैं। प्रशासन कोशिश में है कि आग और आगे न फैले। लेकिन जो नुकसान हो चुका है, उसने नैली गांव के सैकड़ों परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। यह टीस से उबरने में उन्हें सालों से लग जाएंगे।



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