लुधियाना जिले में पल्लेदार यूनियनों की साझी संघर्ष कमेटी ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी लंबित मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो 16 अप्रैल से राज्य की अनाज मंडियों में लोडिंग और अनलोडिंग का काम पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। यह घोषणा रविवार को लेबर यूनियन दफ्तर में आयोजित एक बैठक के दौरान की गई। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि पंजाब की फूड एजेंसियों में ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर मजदूरों को सीधे काम देने और महंगाई के अनुसार मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर पहले भी पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया था। हालांकि, सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पंजाब सरकार के खिलाफ जताया रोष बैठक में पंजाब सरकार द्वारा जारी किए गए एक मेमो को भी पढ़ा गया। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार ने लेबर यूनियनों से किए गए वादों के अनुसार केवल नाममात्र की दरें बढ़ाई हैं, जिससे मजदूरों में असंतोष है। एम.ओ.यू. लागू करने की मांग संघर्ष कमेटी की मुख्य मांगों में पंजाब की फूड एजेंसियों में ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर मजदूरों को सीधे भुगतान करना, हर साल महंगाई के अनुसार मजदूरी दरों में बढ़ोतरी करना, और आर.एल.सी. में संशोधन कर ठेकेदारी प्रणाली खत्म करना शामिल है। एफ.सी.आई. की तर्ज पर बधनीकलां (मोगा) मॉडल के अनुसार एम.ओ.यू. लागू करने की भी मांग की गई है। मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने की मांग इसके अतिरिक्त, वर्ष 2024-25 में बेल्स और क्रेट्स की दरों में वृद्धि, मजदूरों के लिए ग्रुप बीमा लागू करना, गोदामों में स्टैक की ऊंचाई कम करना, और कैंटीन, शौचालय, पीने का पानी, स्नान, चिकित्सा सुविधा, पारिवारिक पेंशन तथा पहचान पत्र जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने की भी मांग की गई है। काम बंद करने की चेतावनी कमेटी ने स्पष्ट किया कि 16 अप्रैल से शुरू होने वाले गेहूं सीजन के दौरान काम बंद होने की पूरी जिम्मेदारी पंजाब फूड डिपार्टमेंट और पंजाब सरकार की होगी। इस बैठक में कमेटी सदस्य रमेश कुमार सहोता, खुशी मोहम्मद, शिंदरपाल सिंह, अवतार कल्याण, कर्म दियोल और हरदेव सिंह सहित बड़ी संख्या में मजदूर उपस्थित थे।
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