जगराओं में नगर कौंसिल की मासिक बैठक उस समय हंगामेदार हो गई जब बैठक की शुरुआत होते ही भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पार्षदों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक नगर कौंसिल के ईओ और कार्यकारी प्रधान कवरपाल की अगुवाई में आयोजित की गई थी। जैसे ही एजेंडे में शामिल प्रस्तावों को पढ़ना शुरू किया गया, विरोधी दल के राणा गुट के पार्षदों ने कई प्रस्तावों पर कड़ा ऐतराज जताया। इतना ही नहीं, 11 पार्षदों ने लिखित रूप में भी अपना विरोध दर्ज कराया। 6 करोड़ रुपये की ग्रांट पर उठे सवाल बैठक के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा उस समय उठा जब शहर के विकास के लिए सरकार द्वारा 6 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने के दावों पर सवाल खड़े हो गए। कार्यकारी प्रधान कवरपाल ने बताया कि जिन विकास कार्यों की शुरुआत की गई थी, उनकी पेमेंट नगर कौंसिल को ही करनी होगी। यह सुनते ही विरोधी पार्षद भड़क उठे और उन्होंने इसे जनता के साथ धोखा बताया। पूर्व कौंसिल प्रधान जतिंदरपाल राणा ने कहा कि यदि भुगतान कौंसिल को ही करना था तो पहले इन प्रस्तावों को हाउस में मंजूरी के लिए लाया जाना चाहिए था। बैठक आगे बढ़ने के साथ-साथ कई अन्य प्रस्तावों पर भी सवाल उठे। बिजली से संबंधित 2.40 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर पार्षदों ने स्पष्ट जानकारी मांगी कि कौन सा सामान खरीदा जाएगा और 200 पोल कहां लगाए जाएंगे। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्रस्ताव लंबित संतोषजनक जवाब न मिलने पर इस प्रस्ताव को लंबित कर दिया गया। इसी तरह 31 लाख रुपये से अधिक के एक अन्य प्रस्ताव में “साहिल कुमार” नामक व्यक्ति का जिक्र होने पर पार्षदों ने उसकी पहचान और भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन सत्ता पक्ष जवाब देने में असफल रहा। श्मशानघाट की बाउंड्री वॉल के प्रस्ताव पर भी स्थिति स्पष्ट न होने के कारण पार्षदों ने इसे भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला बताते हुए मौके पर ही रद्द करवा दिया। वहीं वार्ड नंबर 6 के पार्षद ने कूड़ा डंप का मुद्दा उठाया, जिस पर बताया गया कि करीब 58 लाख रुपये की लागत से कचरा प्रबंधन के लिए मशीनें लगाई जाएंगी। पार्षद रामेश ने लगाया भेदभाव का आरोप पार्षद रामेश कुमार मेषी सहोता ने एससी वार्डों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके वार्ड में 3800 वोटर होने के बावजूद केवल 38 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि अन्य वार्डों को अधिक फंड दिया गया है। पार्षद हिमांशु मलिक ने भी आरोप लगाया कि पहले से जारी वर्क ऑर्डर वाले कामों को दोबारा एजेंडे में डालकर घोटाले की कोशिश की जा रही है। बैठक में हाईकोर्ट में चल रहे केस का मुद्दा भी उठा। कार्यकारी प्रधान ने कहा कि संबंधित कार्य रद्द कर दिए गए हैं, लेकिन विपक्ष ने इस पर असहमति जताते हुए कहा कि बिना अदालत के फैसले के काम नहीं रोके जा सकते। बैठक के बाद जतिंदरपाल राणा ने कहा कि जब तक सरकार ग्रांट जारी नहीं करती, नगर कौंसिल से कोई भुगतान नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो वे कोर्ट का रुख करेंगे।
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