अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते कोटा के सैंड स्टोन, राइस और मसाला इंडस्ट्रीज प्रभावित हुए हैं। डिमांड घटने से करीब 150 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट अटक गया है। सबसे ज्यादा असर स्टोन और राइस एक्सपोर्ट पर पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि अगर युद्ध 15 दिन और चला तो करीब 30 हजार लोगों पर रोजगार का संकट आ सकता है। लगभग 200 स्टोन यूनिट बंद हो जाएंगी। वहीं, मसालों और चावल की यूनिट्स में काम कम हो गया है। वॉर के कारण शिपिंग चार्ज (भाड़ा) बढ़ने से डिमांड कम हो गई है। छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर हैं स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज (SSI) कोटा के संस्थापक सदस्य गोविंद राम मित्तल ने कहा- युद्ध अमेरिका और ईरान के बीच हो रहा है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) असर भारत पर भी पड़ रहा है। खासकर छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। हाड़ौती संभाग (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) से सैंड स्टोन, कोटा स्टोन, राइस, मसाला, केमिकल एक्सपोर्ट किया जाता है। कोटा स्टोन और सैंड स्टोन की 25-25 बड़ी और 100-100 छोटी खदानें हैं, जहां से पत्थर निकलता है और 400 से ज्यादा यूनिट हैं। जहां खान से पत्थर निकलने के बाद कटिंग पॉलिश का काम होता है। हर महीने 100 करोड़ रुपए का स्टोन एक्सपोर्ट होता है। एक यूनिट में 30 से ज्यादा लेबर (कटिंग, पॉलिशिंग, पैकिंग) काम करती हैं। इनमें 50 फीसदी लेबर बाहर (बिहार व अन्य जगहों) की है। लेबर पर रोजगार का संकट कोटा स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज के मेंबर गोविंद राम ने बताया कि- डिमांड नहीं होने के चलते कई स्टोन यूनिट में काम बंद हो गया है। लेबर भी चली गई है। खाड़ी युद्ध के चलते मसाला उद्योग भी बहुत प्रभावित हुआ है। मसाला इंडस्ट्रीज में भी 5 से 6 हजार लेबर काम करती है। पहले हर महीने 5 से 6 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट होता था, लेकिन अभी डिमांड नहीं होने के कारण प्लांट बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। राइस और केमिकल इंडस्ट्री भी प्रभावित मित्तल ने बताया कि- कोटा-बूंदी में 20-22 राइस मिल हैं। यहां से हर महीने 25 करोड़ रुपए का चावल खाड़ी देशों में एक्सपोर्ट होता है। एक राइस मिल में 50-60 मजदूर काम करते हैं। डिमांड घटने से प्रोडक्शन पर असर हुआ है और 25 फीसदी लेबर वापस लौट गई है। ऐसी ही स्थिति केमिकल इंडस्ट्री (यूरिया, फर्टिलाइजर) में भी है। कच्चा माल नहीं आने और डिमांड नहीं होने के कारण प्रोडक्शन लगभग ना के बराबर है। लेबर के पास काम नहीं है, इसलिए वे फसल कटाई में लगे हैं। मित्तल ने कहा कि अगर अमेरिका व ईरान के बीच 15 दिन और युद्ध खिंचा तो 30 हजार लेबर पर रोजगार का संकट आ जाएगा और डिमांड नहीं होने से यूनिटें बंद हो जाएंगी। शिपिंग भाड़ा बढ़ने से स्टोन इंडस्ट्री पर संकट SSI के पूर्व अध्यक्ष और सैंड स्टोन एक्सपोर्टर बीएल गुप्ता ने बताया- कोटा में स्टोन की 400 से 500 छोटी-बड़ी यूनिट हैं और 20 से 25 बड़े एक्सपोर्टर हैं। यहां से हर महीने दो से ढाई हजार कंटेनर का एक्सपोर्ट होता है, जो करीब 100 करोड़ रुपए के आसपास रहता है। 90 प्रतिशत सैंड स्टोन यूके और यूरोपीय देशों में जाता है। युद्ध के कारण शिपिंग का भाड़ा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया है। युद्ध के पहले 800 से 1000 डॉलर प्रति कंटेनर का भाड़ा था, जो बढ़कर 1800 से 2200 डॉलर प्रति कंटेनर हो गया है। भाड़ा बढ़ने से कस्टमर ने ऑर्डर होल्ड पर डाल दिए हैं, जिसके कारण प्रोडक्शन कम हो गया है। प्रोडक्शन कम होने से मजदूर भी कम करने पड़ रहे हैं। युद्ध लंबा खिंचा तो इसका व्यापक असर स्टोन इंडस्ट्री पर होगा। हाड़ौती के कोटा स्टोन का एक्सपोर्ट प्रभावित हाड़ौती कोटा स्टोन एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और कोटा स्टोन व्यापारी देवेंद्र जैन ने बताया कि खाड़ी देशों में हर महीने 15 से 20 करोड़ रुपए का कोटा स्टोन एक्सपोर्ट होता है। इसमें ब्राउन कोटा स्टोन, लेदर कोटा स्टोन और रिवर पॉलिश कोटा स्टोन का एक्सपोर्ट लगभग बंद हो गया है, जबकि यूके व यूएस का शिपिंग चार्ज बढ़ जाने के कारण इन देशों में भी माल नहीं भेज पा रहे हैं। — अमेरिका-ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट से जुड़ी ये 2 खबरें भी पढ़िए…
1. राजस्थान के सोजत में मेहंदी की फैक्ट्रियों में काम बंद:250 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर अटका, व्यापारी बोले-मजदूरों को घर भेजना पड़ रहा है अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की आग में मारवाड़ की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी उद्योग भी झुलस रहा है। राजस्थान के सोजत (पाली) में 150 से ज्यादा फैक्ट्रियों में मशीनों के पहिए थम गए हैं। 2200 से ज्यादा मजदूरों को घर भेजा जा चुका है। (पढ़ें पूरी खबर)
2. राजस्थान में सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद, हजारों लोग बेरोजगार, डिमांड लगातार कम हो रही, घाटा करोड़ों में अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के कारण राजस्थान का मिनरल उद्योग प्रभावित हुआ है। गुजरात के मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्रीज में डिमांड घटने से करीब 2300 से ज्यादा मिनरल्स-ग्राइंडिंग यूनिट्स बंद हो गई हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
Source link