जैसलमेर के रेतीले धोरों के नीचे दबे ‘काले सोने’ (हेवी क्रूड आयल) को निकालने में ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने सफलता हासिल की है। जिले के बाघेवाला फील्ड में कंपनी ने अपने उत्पादन में करीब 70 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। पिछले साल जहां यहाँ से रोजाना 705 बैरल तेल निकल रहा था, वहीं अब यह बढ़कर 1,202 बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। पहली बार ‘CSS’ का सफल प्रयोग जैसलमेर में मिलने वाला कच्चा तेल काफी ‘भारी’ होता है, जिसे सामान्य पंप से निकालना नामुमकिन था। इसे निकालने के लिए OIL ने ‘साइक्लिक स्टीम स्टीम्युलेशन’ (CSS) तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक में कुएं के अंदर तेज गर्म भाप भेजी जाती है, जिससे गाढ़ा तेल पिघलकर पतला हो जाता है और उसे आसानी से ऊपर खींचा जा सकता है। राजस्थान के भारी तेल भंडारों में इस तकनीक का यह पहला और सबसे सफल प्रयोग है। राजस्थान और देश को क्या होगा फायदा इससे रॉयल्टी बढ़ेगी। उत्पादन में 70% की वृद्धि का सीधा मतलब है कि राजस्थान सरकार के खजाने में करोड़ों रुपये की अतिरिक्त रॉयल्टी जमा होगी। साथ ही रिफाइनरी को मजबूती मिलेगी। यहाँ से निकलने वाले तेल को टैंकरों के जरिए मेहसाणा (गुजरात) और फिर कोयली रिफाइनरी भेजा जा रहा है, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं। उत्पादन बढ़ने से बाघेवाला और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। फिशबोन ड्रिलिंग से बढ़ेगी रफ्तार OIL अब यहां ‘फिशबोन ड्रिलिंग’ और ‘इलेक्ट्रिक डाउन होल हीटर्स’ जैसी विश्वस्तरीय तकनीकों को लागू कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जैसलमेर बेसिन में अभी तेल के और भी बड़े भंडार छिपे हो सकते हैं, जिनकी खोज के लिए आगामी वर्षों में निवेश को और बढ़ाया जाएगा। 1991 में हुई थी इस फील्ड की खोज, 52 कुओं में से वर्तमान में 33 सक्रिय गौरतलब है कि बाघेवाला फील्ड 200.26 वर्ग किमी में फैला है। इस फील्ड की खोज 1991 में हुई थी, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन 2017 में शुरू हुआ। 2025-26 अब तक का सबसे सफल साल रहा। रेगिस्तान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद OIL ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्पादन के नए सोपान तय किए हैं। पिछले वर्ष के 32,787 मीट्रिक टन के मुकाबले इस साल कुल उत्पादन 43,773 मीट्रिक टन सालाना रहा। बाघेवाला फील्ड के कुल 52 कुओं में से वर्तमान में 33 कुओं से सक्रिय रूप से उत्पादन लिया जा रहा है। इस साल नई ड्रिलिंग के तहत कंपनी ने 13 नए कुएं खोदे हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 9 थी। सप्लाई चेन बाघेवाला से निकलने वाले कच्चे तेल को टैंकरों के जरिए गुजरात के मेहसाणा (ONGC फैसिलिटी) भेजा जाता है। वहां से पाइपलाइन के माध्यम से इसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की कोयली रिफाइनरी तक पहुँचाया जाता है। यह उपलब्धि न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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