धार भोजशाला में 24 घंटे पूजा के अधिकार की मांग:सर्वे में बताया यहां संस्कृत की शिक्षा दी जाती थी; हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के तर्क पूरे, आज फिर सुनवाई




धार स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में गुरुवार को लगातार चौथे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपना पक्ष रखा और एएसआई सर्वे के आधार पर भोजशाला को सरस्वती मंदिर बताया। जैन ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 1902 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए सर्वे में यह सिद्ध हो चुका है कि भोजशाला एक मंदिर है, जहां संस्कृत की शिक्षा दी जाती थी। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में भी यह स्थान भोजशाला के रूप में दर्ज है। करीब एक घंटे तक जैन ने एएसआई रिपोर्ट के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को यहां 24 घंटे पूजा करने का अधिकार मिलना चाहिए। इसके लिए वर्ष 2003 के आदेश में संशोधन जरूरी है। इसके साथ ही हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से तर्क पूरे हो गए। सर्वे में मिले धार्मिक चिन्हों का हवाला जैन ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में कोर्ट के आदेश पर 98 दिन तक चला सर्वे भी इस बात की पुष्टि करता है। सर्वे में दीवारों और खंभों पर भगवान गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह सहित पशु आकृतियों के चित्र मिले हैं। उन्होंने तर्क दिया कि मस्जिदों में इस प्रकार के चिन्ह नहीं बनाए जाते। साथ ही त्रिशूल मिलने का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कार्बन डेटिंग से यह साबित होता है कि भोजशाला का अस्तित्व मस्जिद से पहले का है और मंदिर के पत्थरों का उपयोग बाद में मस्जिद निर्माण में किया गया। मेहराब बाद में बनाए जाने का दावा जैन के मुताबिक सर्वे में यह भी सामने आया कि मस्जिद में उपयोग किए गए खंभे मूल रूप से भोजशाला के ही हिस्से थे, जबकि दीवारों पर बने मेहराब बाद में जोड़े गए। आज फिर होगी सुनवाई गुरुवार को सुनवाई के दौरान दूसरे याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से वकील ने बताया कि वे हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के तर्कों का समर्थन करते हैं, लेकिन कुछ अतिरिक्त बिंदु भी रखना चाहते हैं। दस्तावेज स्कैन नहीं होने के कारण वे शुक्रवार को विस्तृत तर्क पेश करेंगे। कोर्ट अब इस मामले में शुक्रवार को फिर सुनवाई करेगा।



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