दिव्यांग का स्वीकृत आवास सचिव ने किया निरस्त:10 हजार रिश्वत मांगने का आरोप, पैसे न देने पर लिस्ट से नाम हटाया, कई आवास रोके




शिवपुरी जिले के कोलारस जनपद की गणेशखेड़ा पंचायत में आवास योजना घोटाले के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पंचायत सचिव साहब सिंह रावत पर हितग्राहियों से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप लगे हैं। पैसे नहीं देने पर दिव्यांग सहित कई ग्रामीणों के आवास रोक दिए गए, जबकि एक दिव्यांग का तो स्वीकृत आवास ही निरस्त कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद जांच दल गठित कर रिपोर्ट जिला पंचायत को भेज दी गई है। किस्त जारी कराने के नाम पर वसूली का आरोप
गणेशखेड़ा पंचायत के पिपरौदा गांव के ग्रामीणों ने पंचायत सचिव साहब सिंह रावत पर आरोप लगाया है कि वे आवास योजना का लाभ दिलाने और किस्त जारी कराने के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। जो लोग पैसे देने से इनकार कर रहे हैं, उनके आवास लंबित कर दिए जा रहे हैं। दो महीने बाद भी नहीं मिली पहली किस्त
विनोद धाकड़ और मनीष धाकड़ का कहना है कि उनका आवास स्वीकृत हुए करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक पहली किस्त उनके खातों में नहीं आई। जब भी वे सचिव से संपर्क करते हैं, उन्हें कभी बजट की कमी तो कभी तकनीकी कारण बताकर टाल दिया जाता है, जबकि अंदरखाने पैसे की मांग की जाती है। दिव्यांग का आवास किया निरस्त
पिपरौदा गांव के दिव्यांग देवेंद्र वर्मा का मामला इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर और संवेदनशील है। देवेंद्र ने बताया कि करीब तीन महीने पहले उनका नाम आवास योजना की सूची में शामिल किया गया था। वे बेहद गरीब हैं और झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे हैं। पैसे न देने पर सूची से नाम हटाने का आरोप
देवेंद्र के अनुसार, सूची में नाम आने के कुछ समय बाद पंचायत सचिव साहब सिंह रावत ने उनसे 10 हजार रुपये की मांग की। देवेंद्र ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पैसे देने से मना कर दिया। इसके बाद पहले उनके आवास की प्रक्रिया रोक दी गई और फिर कुछ समय बाद उनका नाम सूची से ही हटा दिया गया। यानी उनका स्वीकृत आवास निरस्त कर दिया गया। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की
उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई। वहां से उन्हें जवाब मिला कि उनके नाम पर पहले से पक्का मकान दर्ज है, इसलिए उन्हें अपात्र माना गया। देवेंद्र का कहना है कि यह पूरी तरह गलत है। वे अपने पिता से अलग रहते हैं, उनके पास खुद का कोई पक्का मकान नहीं है और वे झोपड़ी में गुजर-बसर कर रहे हैं। उनके नाम अलग से बीपीएल राशन कार्ड भी बना हुआ है, जो उनकी पात्रता को दर्शाता है। अपात्रों को लाभ देने का आरोप
देवेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत में पैसे लेकर ऐसे लोगों को आवास योजना में शामिल किया गया है, जिनके पास पहले से पक्के मकान, जमीन और ट्रैक्टर तक हैं। सरपंच पक्ष ने भी जताई आपत्ति
सरपंच प्रतिनिधि और सरपंच पुत्र बलबीर धाकड़ ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पंचायत सचिव अपने दायित्वों का सही निर्वहन नहीं कर रहे हैं और हितग्राहियों से अवैध वसूली की जा रही है। इस संबंध में जिला पंचायत में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। कोलारस जनपद सीईओ दिनेश शाक्य ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय दल गठित किया गया था। जांच पूरी कर रिपोर्ट जिला पंचायत कार्यालय भेज दी गई है। वहीं जिला पंचायत सीईओ विजय राज ने कहा कि जांच प्रतिवेदन प्राप्त हो चुका है, जिसे देखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *