राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने ट्रैप कार्रवाई करते हुए PWD से जुड़े सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (SIA) कंसल्टेंट याकूब को जयपुर के चौमू पुलिया क्षेत्र से 33 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। इसके साथ ही झुंझुनूं में PWD के XEN राकेश कुमार को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई एडिशनल एसपी संदीप सारस्वत और उनकी टीम ने की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जमीन का अलाइनमेंट बदलने और पीड़ित के खेत को नेशनल हाईवे व स्टेट हाईवे के बीच प्रस्तावित प्रोजेक्ट में शामिल नहीं करने के बदले कुल 70 लाख रुपये की घूस मांगी गई थी। क्या है पूरा मामला? एडिशनल एसपी संदीप सारस्वत ने बताया कि पीड़ित का खेत नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के बीच प्रस्तावित सड़क प्रोजेक्ट के अलाइनमेंट में आ रहा था। खेत को इस प्रोजेक्ट से बाहर रखने और जमीन का अलाइनमेंट बदलने के लिए कुल 70 लाख रुपये की डील तय हुई। 33 लाख रुपये पहली किश्त के रूप में लिए जा रहे थे। रकम आगे XEN तक पहुंचनी थी। ACB को शिकायत मिलने के बाद पूरी योजना के साथ ट्रैप बिछाया गया। चौमू पुलिया से दबोचा गया याकूब जांच एजेंसी को सूचना मिली थी कि याकूब 33 लाख रुपये लेकर अपने गांव जा रहा था और यह रकम आगे XEN राकेश कुमार को देने वाला था। इसी सूचना पर टीम ने शुक्रवार रात जयपुर के चौमू पुलिया इलाके में घेराबंदी कर याकूब को दबोच लिया। इसके बाद झुंझुनूं में चिड़ावा निवासी XEN राकेश कुमार को भी हिरासत में लिया गया। SIA नोटिफिकेशन में भी था याकूब का नाम जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कंसल्टेंसी फर्म सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (SIA) का काम करती है। इस प्रक्रिया में कंसल्टेंसी फर्म को विभाग की ओर से नोटिफाई किया जाता है। गजट नोटिफिकेशन जारी होता है। अखबारों और PWD वेबसाइट पर सार्वजनिक सूचना प्रकाशित होती है। आपत्ति/सुझाव के लिए प्रतिनिधि का नाम और संपर्क जारी किया जाता है इसी नोटिफिकेशन में “झुंझुनूं यस प्राइवेट लिमिटेड” के प्रतिनिधि के तौर पर याकूब का नाम दर्ज बताया जा रहा है। किसी भी भूमि या अलाइनमेंट संबंधी आपत्ति के लिए याकूब से संपर्क का उल्लेख था, जिससे उसकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। XEN से लगातार संपर्क में था याकूब सारस्तवत ने बताया कि याकूब ही पीड़ित को XEN राकेश कुमार तक लेकर गया था और वह लगातार XEN के संपर्क में था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या याकूब सिर्फ बिचौलिया था या आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा। क्या अन्य अधिकारी/कर्मचारी भी इस नेटवर्क में शामिल हैं। नोटिफिकेशन प्रक्रिया का दुरुपयोग कैसे किया गया। जमीन अलाइनमेंट बदलने से किसे सीधा लाभ मिलने वाला था। ‘पब्लिक सर्वेंट’ एंगल से भी जांच चूंकि याकूब का नाम आधिकारिक SIA नोटिफिकेशन में प्रतिनिधि के रूप में सामने आया है, इसलिए ACB इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या उसे भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत ‘पब्लिक सर्वेंट’ की श्रेणी में माना जा सकता है। यह जांच केस को और बड़ा बना सकती है। ACB की जांच में और बड़े खुलासों के संकेत एडिशनल एसपी संदीप सारस्वत के नेतृत्व में चल रही जांच में अब कंसल्टेंसी फर्म, विभागीय अधिकारियों और नोटिफिकेशन प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। संभावना है कि इस केस में कुछ और नाम सामने आ सकते हैं।
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