पिछले साल इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो नवजातों की मौत का मामला सामने आ चुका है। अब भोपाल के एम्स में भी ऐसा ही खतरा दिख रहा है। यहां नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में चूहों की घुसपैठ ने सबसे सुरक्षित माने जाने वाले वार्ड की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस यूनिट में समय से पहले जन्मे और गंभीर हालत वाले नवजात भर्ती रहते हैं। करीब 20 बेड वाले वार्ड में अधिकांश समय सभी बेड भरे रहते हैं। स्टाफ कई दिनों से चूहों की आवाजाही की शिकायत कर रहा था। प्रबंधन को जानकारी दी गई, लेकिन तुरंत कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतें बढ़ने के बाद पेस्ट कंट्रोल कराया गया। इसके बाद भी चूहों के दिखने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे मॉनिटरिंग सिस्टम पर सवाल उठे हैं। हाई कोर्ट ने इंदौर मामले को माना था गंभीर लापरवाही, सस्पेंड हुए थे डॉक्टर इंदौर… सितंबर में दो मौतें हुई थीं 31 अगस्त-1 सितंबर 2025 की रात इंदौर के एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में दो नवजातों को चूहों ने काट लिया था, जिनकी बाद में मौत हो गई थी। हाई कोर्ट तक मामला पहुंचा। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना और एक डॉक्टर सहित 8 लोगों को सस्पेंड किया गया था। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. पंकज शुक्ला, रोग विशेषज्ञ काटें नहीं, तो भी बच्चों के लिए खतरनाक हैं चूहे एनआईसीयू अत्यंत संवेदनशील और नियंत्रित वातावरण वाला क्षेत्र होता है, जहा नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का बाहरी जैविक जोखिम, विशेष रूप से चूहों की उपस्थिति, पूरी तरह अस्वीकार्य है। चूहे विभिन्न प्रकार के रोगजनक सूक्ष्मजीवों, जैसे बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी के वाहक होते हैं। ये अपने शरीर, मल-मूत्र और लार के माध्यम से संक्रमण फैलाते हैं। यानी, काटें नहीं तो भी खतरा हैं। एनसीयू जैसे वातावरण में, जहां हवा, सतह और उपकरणों को यथासंभव बैक्टीरिया-मुक्त रखा जाता है, चूहों की मौजूदगी संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है। ये इलेक्ट्रिक केबल, मेडिकल उपकरणों और जीवनरक्षक प्रणालियों को कुतर सकते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है।
(डॉ. शुक्ला एनएचएम के पूर्व डायरेक्टर व शिशु रोग विशेषज्ञ हैं।)
नियमों में इस पर जीरो टॉलरेंस … डब्ल्यूएचओ, आईसीएमआर और नियोनेटोलॉजी गाइडलाइंस के अनुसार एनआईसीयू पूरी तरह पेस्ट-फ्री होना चाहिए। चूहों के लिए जीरो टॉलरेंस नीति है। नियमित सैनिटाइजेशन ऑडिट जरूरी। अभी पेस्ट कंट्रोल प्रक्रिया को सघन किया जा रहा है, जिसके कारण चूहे एवं कॉकरोच सेंट्रलाइज्ड कूलिंग सिस्टम/टावर्स की फॉल्स सीलिंग से बाहर निकलकर वार्डों के अंदर दिखाई दे रहे हैं। -डॉ. विकास गुप्ता, मेडिकल सुप्रीटेंडेंट, एम्स भोपाल
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