किले के ठीक पास ऊंचा पहाड़, जो कभी दुश्मनों पर नजर रखने के लिए रियासतकालीन शिकारगाह (वॉच टॉवर) का अहम ठिकाना था, आज उसके अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। रामदास घाटी से जैसे ही हम जमीनी हकीकत जानने आगे बढ़े, तस्वीर बदलती नजर आई। घोसीपुरा के रास्ते इस पहाड़ के ऊपर जाने का बाकायदा रोड है। पहाड़ी की चढ़ाई करते हुए आगे बढ़ते समय अवैध कब्जों का जाल नजर आया। कभी हरी-भरी इस पहाड़ी पर अब हरियाली नजर नहीं आती है। जगह-जगह पहाड़ को काटकर बनाए गए रास्ते, लोगों द्वारा खुद बनाई गई सीढ़ियां और ऊपर तक जाती सड़क इस अतिक्रमण की कहानी खुद बयां कर रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पहाड़ी पर बने पुराने कुंड तक खोदकर पाट दिए गए और उन पर मकान खड़े कर दिए गए। साफ है, वोट बैंक की राजनीति के आगे यह ऐतिहासिक पहाड़ धीरे-धीरे दम तोड़ता नजर आ रहा है। वोट बैंक ने निगल ली सत्यनारायण की टेकरी, हजार के पार हुए कब्जे नजूल में दर्ज फिर भी होता रहा अतिक्रमण, अब हटाना बना बड़ी चुनौती स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पहाड़ी नजूल में दर्ज है। निजी लीज के बजाय शासकीय भूमि है। वे दशकों से यहां रह रहे हैं। उनके पास 1998 के आसपास के पट्टे हैं। जनप्रतिनिधियों का सहयोग यहां अवैध निर्माण की संख्या एक हजार पार है। एक दशक पहले प्रशासन ने यहां संयुक्त कार्रवाई का प्रयास किया था, लेकिन यहां के लोग हिंसक हुए और उन्होंने पथराव कर गाड़ियां तोड़ीं और निगम व पुलिस के अमले को घायल भी किया। एसडीएम से रिपोर्ट लेकर करेंगे कार्रवाई
पहाड़ियों पर अवैध कब्जे को लेकर समय-समय पर कार्रवाई होती है। शहर की सत्यनारायण सहित अन्य पहाड़ियों के अतिक्रमण के संबंध में क्षेत्र के सम्बंधित एसडीएम से रिपोर्ट लेकर सख्त कार्रवाई करेंगे।।
-सीबी प्रसाद, एडीएम हाईकोर्ट के आदेश…- धरोहर के रूप में संरक्षित करें
हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अगस्त 2025 में आदेश जारी किया, जिसमें प्रशासन को टेकरी को अतिक्रमण मुक्त कराने और इसे ऐतिहासिक व हरित धरोहर के रूप में संरक्षित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने इसे शहर के फेफड़े के समान बताया और जिला प्रशासन, नगर निगम व वन विभाग से 15 दिनों में व्यापक संरक्षण योजना मांगी है। इससे पहले 2020 में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान वाले मामले में साफ कहा था कि स्मारक जैसी दिखने वाली इस टेकरी के चारों ओर बेरहमी से खुदाई हुई है। 2023 में ग्वालियर खंडपीठ ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद भी अवैध कब्जे नहीं हटे। 2021 में पुरातत्व विभाग ने टेकरी को ऐतिहासिक इमारतों में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया था। उस समय कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस पहाड़ी के अस्तित्व पर खतरा बताया था।
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