बिहार के सबसे बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक समागम ‘राजगीर मलमास मेला’ की तैयारियां तेज हो गई है। इस बार का मेला बेहद खास होने वाला है। इसमें चार शाही स्नान होंगे, जहां देशभर से आए साधु-संतों का भारी हुजूम उमड़ेगा। पुरुषोत्तम मास के इस पावन अवसर पर राजगीर के ऐतिहासिक ब्रह्मकुंड और सप्तधारा में लाखों श्रद्धालु श्रद्धा की डुबकी लगाएंगे। श्री राजगृह तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा समिति के प्रवक्ता सुधीर कुमार उपाध्याय ने बताया कि मेले को भव्य बनाने के लिए प्रशासन और समिति कई स्तरों पर काम कर रही है। राजगीर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने के साथ-साथ सफाई व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों को कोई असुविधा न हो। पौराणिक महत्व: यहां सजता है देवताओं का दरबार पद्म पुराण का हवाला देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि मलमास के दौरान सभी 33 कोटि देवी-देवता राजगृह श्रीकुंड धाम में विराजमान रहते हैं। मान्यता है कि इस दौरान ब्रह्मकुंड में स्नान करने से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के दर्शन कर वैतरणी में स्नान करने वाले प्राणियों को भवसागर से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त होता है। शाही स्नान की तिथियां (17 मई से 15 जून) इस वर्ष मलमास मेला 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा। श्रद्धालुओं के लिए चार प्रमुख शाही स्नान की तिथियां निर्धारित की गई हैं।
कौओं का वर्जित क्षेत्र है राजगीर मेले से जुड़ी एक रोचक कथा का जिक्र करते हुए पंडा समिति ने बताया कि राजा वसु के वाजपेई यज्ञ के समय ब्रह्मा जी की कृपा से पहाड़ों से गर्म पानी प्रकट हुआ था। यज्ञ में सभी देवताओं को बुलाया गया, लेकिन गलती से काग भुशुंडि जी को निमंत्रण नहीं मिला। यही कारण है कि आज भी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास के एक महीने तक राजगीर की सीमा में काला कौआ नजर नहीं आते।
Source link