भागलपुर में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन सख्त:री-एडमिशन फीस-महंगी किताबों पर लगाम के निर्देश, डीएम बोले- शिक्षा सभी का अधिकार




भागलपुर में निजी स्कूलों में री-एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से मनमानी शुल्क वसूली और महंगी किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। इस पर जिला प्रशासन सख्त हो गया है। इस मुद्दे पर आज जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने टाउन हॉल में निजी स्कूल के हेड मास्टर और संचालकों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में उप विकास आयुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना तुरंत बंद करें बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है, जहां किसी भी प्रकार से अमीर-गरीब का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सभी स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना तुरंत बंद करें। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। मनमानी फीस पर सख्त चेतावनी डीएम ने कहा कि कई अभिभावकों की ओर से शिकायत मिली थी कि री-एडमिशन के नाम पर मनमाने ढंग से शुल्क वसूला जा रहा है। विशेष दुकानों से महंगी किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह पूरी तरह अनुचित और नियमों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी विद्यालय की ओर से गाइडलाइन का उल्लंघन किया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जारी सभी महत्वपूर्ण निर्देशों से विद्यालय संचालकों को अवगत करा दिया गया है और उनका अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा। जिला प्रशासन इस मामले की लगातार निगरानी करेगा। गरीब छात्रों के अधिकारों पर जोर बैठक में डीएम ने कहा कि शिक्षा सबका अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के नियमों के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों का भी निजी विद्यालयों में नामांकन अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “विद्यालय शिक्षा का मंदिर है। यहां किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार गरीब और अमीर सभी विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।” जिला प्रशासन के इस सख्त रुख से अभिभावकों में राहत की उम्मीद जगी है।



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