वृंदावन में हुए नाव हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। इन सभी को लुधियाना के जगराओं का ‘बांके बिहारी क्लब’ धार्मिक यात्रा पर लेकर गया था। जिसे आज से करीब 9 साल पहले दो सगे भाइयों और एक अन्य युवक ने मिलकर बनाया। इसी हादसे में इन दो भाइयों में से एक की मौत भी हो गई। 16-17 साल की उम्र में मंदिरों में संकीर्तन से शुरुआत की। फिर तीनों ने मिलकर इस क्लब को बनाया। इसके बाद धीरे-धीरे इसमें लोग जुड़ते चले गए। क्लब घर-घर संकीर्तन करता था। 5 साल पहले इन्होंने वृंदावन की यात्रा करवाना शुरू किया। इस बार वह 9 अप्रैल को 2 बसों में 130 लोगों को वृंदावन ले गए थे। 10 अप्रैल को हादसा हो गया। जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई। पढ़िए कब ‘बांके बिहारी क्लब’ बना और कैसे इससे लोग जुड़े… क्लब बनने से लेकर यात्राएं करवाने तक की कहानी… मंदिरों पर संकीर्तन करते, फिर लोग जुड़े: जगराओं के रहने वाले यशु बजाज कॉशमेटिक की दुकान चलाते हैं। वहीं लवी और मधुर दोनों भाई कचहरी में फोटो स्टेट की दुकान चलाते हैं। यशु बजाज और लवी ने करीब 16 से 17 साल की उम्र में मंदिरों पर संकीर्तन करने शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे उनके साथ लवी बहल का भाई मधुर बहल भी जुड़ गया। वह मंदिरों के अलावा लोगों के बुलावे पर भी उनके घर पर संकीर्तन रकने जाने लगे। यशु बजाज और लवी बहल दोनों भजन गाते हैं और उनके साथ बाकी पांच से छह लोग बतौर म्युजिशयन जुड़े हैं। 9 साल पहले बांके बिहारी क्लब बनाया: धीरे-धीरे यशु बजाज और लवी बहल का नाम हो गया। इसके बाद उन्हों ने करीब 9 साल पहले बांके बिहारी के नाम से क्लब बना लिया। क्लब में किसी को सदस्य नहीं बनाया जाता है। इसके मुख्य कर्ता-धर्ता यशु बजाज और लवी बहल हैं। दोनों अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस क्लब को चलाते हैं। संकीर्तन करते रहे, लोग जुड़ते गए: क्लब के सदस्य लोगों के घरों या धार्मिक संस्थाओं के बुलावे पर संकीर्तन करते हैं। जो भी संकीर्तन में आता है, वो इनके साथ जुड़ते जाते हैं। इसके अलावा इन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पेज बनाएं हैं। प्रोफशनल क्लब नहीं, भक्ति प्रचार का साधन: बांके बिहारी क्लब के सभी सदस्य शहर व अन्य जगहों पर संकीर्तन करते हैं। यह उनका प्रोफेशनल क्लब नहीं है, बल्कि वो इस के जरिए भक्ति का प्रचार करते रहे हैं। क्लब मैंबर्स ने कहा कि इसलिए उन्होंने इस क्लब को रजिस्टर्ड भी नहीं करवाया। पांच साल से यात्रा करवा रहे: यशु बजाज ने बताया कि बीते पांच साल से यात्रा लेकर जा रहे हैं। वह सिर्फ वृंदावन की यात्रा कराते हैं। इस तरह की धार्मिक यात्राओं के लिए कोई परमिशन नहीं ली जाती। सोशल मीडिया के जरिए लोग यात्रा पर जाने के लिए संपर्क करते हैं। इसमें ज्यादातर लोग वो होते हैं, जो खुद भी जाते हैं और आगे अपने रिश्तेदारों को लेकर भी जाते हैं। ज्यादातर परिवार ऐसे हैं, जो हर बार उनके साथ यात्रा में जाते हैं। *************** ये खबर भी पढ़ें: वृंदावन नाव हादसा, 5 चिताएं एकसाथ जलीं: अबोहर के युवक की लाश मिली, लुधियाना की युवती लापता, अब तक 11 मौतें वृंदावन नाव हादसे में मारने वाले 5 लोगों की लुधियाना के जगराओं में एक साथ चिताएं चलीं। इसमें कविता बहल, चरणजीत, मधुर बहल, पिंकी बहल और ईशान कटारिया शामिल हैं। मधुर बहल के परिवार ने राधा-राधा कहकर उनको अंतिम विदाई दी। (पढ़ें पूरी खबर)
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