वंदे मातरम् पर बयान से बढ़ा विवाद, कोर्ट पहुंचा मामला:पार्षद रुबीना खान और फौजिया शेख के खिलाफ निजी परिवाद; सांप्रदायिक सौहार्द का मुद्दा उठा




कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख और रुबीना खान द्वारा इंदौर नगर निगम बजट सत्र के अंतिम दिन वंदे मातरम् नहीं गाने को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के विरोध में जिला कोर्ट में निजी परिवाद दायर किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास अवस्थी ने एडवोकेट आकाश शर्मा के माध्यम से जिला कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया है कि संबंधित पार्षदों ने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह बयान दिया कि इस्लाम में ‘वंदे मातरम्’ गाना प्रतिबंधित है। परिवाद में कहा गया है कि इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसमें विभिन्न समुदायों के लोगों द्वारा एक-दूसरे पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई गई है। परिवादी ने कोर्ट से मांग की है कि मामले में भादंवि की धारा 153-ए, 153-बी, 295-ए और 505 के तहत प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं। प्रकरण पर कोर्ट द्वारा आगे की सुनवाई की जाएगी। फौजिया बोली थीं- किस एक्ट में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य इंदौर नगर निगम बजट सत्र के दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने कहा था कि उन्हें वह एक्ट दिखाया जाए, जिसमें ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य बताया गया हो। फौजिया ने कहा कि उनका धर्म इस्लाम उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं देता। पार्षद रुबीना बोली थीं- कुरान ‘वंदे मातरम’ गाने की इजाजत नहीं देता पार्षद रुबीना इकबाल खान ने कहा था कि कुरान ‘वंदे मातरम’ गाने की इजाजत नहीं देता है, इसलिए इसे लेकर जबरदस्ती करना गलत है। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… वंदे मातरम् विवाद के बाद कांग्रेस में कलह इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में हुआ वंदे मातरम् विवाद धर्म और राष्ट्रवाद के दायरे से बाहर निकलकर राजनीतिक रूप ले चुका है। ऊपर से यह राष्ट्रीय गीत के सम्मान की लड़ाई दिख रही है, लेकिन इसकी गहराई में कांग्रेस की गुटबाजी और नगर निगम की सत्ता से जुड़ी बड़ी साजिश के आरोप लग रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर।



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