चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में FAR बढ़ाने की तैयारी:केंद्र की मंजूरी से उद्योगों को मिलेगा फायदा, 30 जून तक गृह मंत्रालय ने मांगी थी रिपोर्ट




चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया में उद्योगपतियों को बड़ी राहत देने की दिशा में प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। इंडस्ट्रियल प्लॉट्स का फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने की सिफारिशों वाली रिपोर्ट प्रशासक गुलाब चंद कटारिया तक पहुंच चुकी है। अब इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही लंबे समय से चल रही उद्योगपतियों की मांग पूरी होने की उम्मीद है। डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित 11 सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में एफएआर को 0.75 से बढ़ाकर 2 करने की सिफारिश की है। पहले इसे 1.50 तक बढ़ाने का विचार था, लेकिन अब इसे सीधे 2 तक ले जाने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं फेज-3 के लिए एफएआर 2.50 करने की सिफारिश की गई है, जो पहले 2.20 प्रस्तावित था। प्लॉट का कवर एरिया बढ़ेगा एफएआर बढ़ने से प्लॉट का कवर एरिया बढ़ेगा, जिससे उद्योगपतियों को काम करने के लिए अधिक जगह मिलेगी। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और कारोबार को भी गति मिलेगी। साथ ही प्रशासन के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। कमेटी ने इंडस्ट्रियल प्लॉट्स में सेंट्रल कोर्टयार्ड (केंद्रीय आंगन) की अनिवार्यता समाप्त करने का भी प्रस्ताव दिया है। इसकी जगह आगे और पीछे सेटबैक रखने का प्रावधान किया गया है।
इस बदलाव से कई उद्योगपतियों को राहत मिलेगी, क्योंकि पुराने नियमों के चलते लगे मिसयूज और उल्लंघन के नोटिस भी खत्म हो सकेंगे। 30 जून तक गृह मंत्रालय ने मांगी थी रिपोर्ट केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को इस विषय पर 30 जून तक काम पूरा करने का समय दिया था। अब रिपोर्ट तैयार होकर प्रशासक तक पहुंच चुकी है और जल्द ही इसे केंद्र के पास भेजा जाएगा। मोहाली, पंचकूला, डेराबस्सी, बरवाला और बद्दी जैसे क्षेत्रों में पहले से ही एफएआर 2.5 से 3 तक है। ऐसे में चंडीगढ़ में एफएआर बढ़ने से उद्योगपतियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा और वे अन्य शहरों की ओर पलायन करने से बचेंगे। फेज-3 के विकास पर प्रशासन का फोकस प्रशासन इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 के विकास पर खास ध्यान दे रहा है। इसी के तहत अगले महीने से नए प्लॉट्स की ई-नीलामी शुरू करने की योजना है। अधिकारियों का मानना है कि एफएआर बढ़ने से जो प्लॉट अभी तक नहीं बिक रहे हैं, वे भी आसानी से नीलाम हो सकेंगे। चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने भी एफएआर का मुद्दा लोकसभा में उठाया था। इसके बाद इस दिशा में तेजी से काम हुआ और कमेटी ने उद्योगपतियों से बातचीत कर राहत देने वाली रिपोर्ट तैयार की। जोनिंग पैरामीटर लागू करने का प्रस्ताव कमेटी ने दो कनाल तक के प्लॉट्स के लिए आर्किटेक्चरल कंट्रोल की जगह जोनिंग पैरामीटर लागू करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य भूमि के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना और अनावश्यक खाली जगह की बर्बादी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार सेंट्रल कोर्टयार्ड की व्यवस्था पहले प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन के लिए बनाई गई थी, लेकिन आधुनिक तकनीक और सर्विस सेक्टर के बढ़ते प्रभाव के कारण अब यह उद्योगों के विस्तार में बाधा बन रही है।



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