सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा-2021 तो याद ही होगी…एग्जाम सेंटर से लेकर स्ट्रॉन्ग रूम तक से पेपर लीक हुए। किसी ने डमी कैंडिडेट बैठाकर एग्जाम पास किया तो कोई नकल मारकर थानेदार बना था। नतीजा ये रहा कि पूरी भर्ती परीक्षा ही रद्द हुई। 5 साल बाद 5 और 6 अप्रैल को 1056 पदों पर सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2025 हुई। एक बार फिर से वही चैलेंज सामने थे। माफिया फिर से एक्टिव थे। राजस्थान SOG की सूझबूझ से अबकी चीटिंग से पहले ही 15 वांटेड दबोचे गए। ब्लूटूथ से नकल, डमी कैंडिडेट या फिर धांधली से जुड़ा कोई भी मामला सामने नहीं आया। इसके लिए SOG ने कई महीने पहले से तैयारी कर रखी थी। धांधली की खबर देने वाले को एक लाख के इनाम की घोषणा हुई। एग्जाम सेंटर पर अभ्यर्थियों की एंट्री के बाद पेपर सेट पहुंचाए गए। एग्जाम के दौरान 1000 से ज्यादा मोबाइल टावरों को सर्विलांस पर लिया गया। परीक्षा के सफल आयोजन के लिए ऐसे 6 प्लान बनाए गए थे। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए- कैसे इस साल के सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों को पहले ही रोक लिया गया… प्लान-1 : मुखबिर तंत्र एक्टिव किया
अप्रैल में एग्जाम से कई महीनों पहले ही एसओजी ने अपने मुखबिर तंत्र को एक्टिव कर दिया था। इससे एसओजी को इनपुट मिले कि अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बनने वाले या नकल करने वाले अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इसके बाद एसओजी ने फिल्डिंग जमाई। एग्जाम से पहले प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी कर 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें कई अभ्यर्थी पूर्व में डमी कैंडिडेट बन चुके थे। कई खुद की जगह डमी कैंडिडेट को एग्जाम में बिठा चुके थे। ज्यादातर वांटेड खुद एग्जाम देने आए थे। एसओजी को इनकी लंबे समय से तलाश थी। प्लान-2 : ब्लूटूथ पर नकेल मार्च 2022 में हाईकोर्ट की लिपिक ग्रेड परीक्षा में कई सेंटरों पर ब्लूटूथ से नकल हुई थी। कई भर्ती परीक्षाओं में ऐसे मामले सामने आ चुके थे। ऐसे में ब्लूटूथ से नकल रोकने के लिए पहली बार 1000 से अधिक मोबाइल टावरों को सर्विलांस पर लिया गया। ये टावर एग्जाम सेंटर के नेटवर्क एरिया (बीटीएस लोकेशन) के ही थी। करीब 1174 से अधिक सेंटर्स बनाए गए थे। जब एग्जाम चल रहा था, तब एसओजी टावरों से होने वाले मोबाइल कॉल, वाई-फाई, ब्लूटूथ कॉल पर निगरानी कर रही थी। प्लान-3 : पहले अभ्यर्थी बाद में पहुंचे पेपर
पहले भर्ती परीक्षाओं में पेपर सेट, एग्जाम सेंटर पर 2 से 3 घंटे पहले पहुंच जाते थे। उन्हें परीक्षा केंद्र पर ही बने स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता था। पिछली कुछ भर्तियों में खुलासा हुआ कि एग्जाम सेंटर से ही पेपर लीक हुए। माफिया इन पेपर को एग्जाम शुरू होने से कुछ देर पहले ही सॉल्व करवा देते थे। सितंबर 2021 में जेईएन भर्ती का पेपर भी इसी तरह एग्जाम सेंटर से ही लीक किया गया था। पहली बार इस तरह का प्लान बनाया, जिसे नकल गैंग नहीं भेद सके। इस बार अभ्यर्थी के सेंटर में पहुंचने के बाद परीक्षा पेपर सेट भेजे गए। आरपीएससी ने 5 अप्रैल और 6 अप्रैल को परीक्षा कराई थी। पहली पारी में परीक्षा सेंटर में सुबह 9 से 10 बजे तक एंट्री थी। पेपर 11 बजे शुरू हुआ था। साढ़े 10 बजे सेंटर पर पेपरों का पहुंचना शुरू हुआ। 30 मिनट में पेपर क्लास में बंटे और अभ्यर्थियों तक पहुंचे थे। इसी प्रकार से दूसरी पारी के पेपर में भी आधा घंटा पहले पेपर पहुंचाए गए। प्लान-4 : नकल गैंग की सूचना देने पर 1 लाख का इनाम SOG ने नकल गैंग, डमी कैंडिडेट की जानकारी देने पर 1 लाख रुपए का इनाम रखा था। इस कारण एसओजी के पास अलग-अलग माध्यम से कई जानकारी सामने आई, जिन पर एसओजी की टीमों ने काम किया। इसका परिणाम ये रहा कि परीक्षा के दौरान दो दिन में कई आरोपी पकड़ में आ सके। जोधपुर के बासनी तंबोलिया सेंटर पर परीक्षा देकर बाहर निकल रहे वांटेड पप्पू राम की गिरफ्तारी भी इसी का नतीजा है। पप्पू राम SI भर्ती- 2021 में नकल के मामले में फरार था। प्लान- 5 : एग्जाम वाले 26 जिलों में भेजी 26 टीमें
SI भर्ती परीक्षा के सेंटर इस बार 26 जिलों में ही रखे गए थे। परीक्षा से पहले ही एसओजी ने 26 जिलों में अपनी टीमें भेज दीं। इससे पूरे जिले में ये मैसेज चला गया कि गड़बड़ी की तो कार्रवाई तय है। एसओजी ने जिला पुलिस की मदद के लिए एक-एक अधिकारी को 26 जिलों में तैनात कर दिया। इसके कारण से न सिर्फ गड़बड़ी करने वाले बल्कि उनका सहयोग करने वाले भी परीक्षा से दूर रहे। प्लान-6 : परीक्षा सेंटर के आसपास साइबर कैफे, वाइफाई पर रखी नजर
एसओजी की टीमों ने हर एग्जाम सेंटर के आसपास के 500 मीटर तक के इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। जहां पर कैफे, वाइफाई फैसिलिटी थी, उन्हें एग्जाम के दौरान बंद रखने के निर्देश दिए। एग्जाम सेंटर के अंदर भी किसी स्टाफ को स्मार्टफोन के साथ एंट्री नहीं दी गई। इस परीक्षा में नहीं हुई किसी भी प्रकार से कोई नकल
एडीजी एसओजी विशाल बंसल बताते हैं- इस परीक्षा में 7 लाख 35 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। परीक्षा को बिना किसी व्यवधान के पूरा करना सबसे बड़ा चैलेंज था। एसआई भर्ती परीक्षा-2025 के 2 दिन और 4 पारियों में किसी भी प्रकार से डमी कैंडिडेट के बैठने, ब्लूटूथ से नकल या अन्य किसी भी प्रकार की कोई शिकायत सामने नहीं आई। परीक्षा पारदर्शी तरीके से कराने के लिए पहले से तैयारी थी। प्रदेश भर से वांटेड की लिस्ट तैयार कर ली गई थी। DIG पारिस देशमुख ने जिला पुलिस अधीक्षकों को लिस्ट भेजकर पूरा कोआर्डिनेशन किया। एग्जाम सेंटर वाले सभी जिलों में SOG के एक-एक अधिकारी को भेजकर नोडल अधिकारी बनाया गया। इससे एग्जाम में गड़बड़ी करने वाले 15 वांटेड को हम पहले ही अरेस्ट कर पाए। कुछ अन्य प्रयोग भी कामयाब रहे। अब एग्जाम से पहले पकड़े गए वांटेड की डिटेल…. सियाराम मीना : 15 लाख देकर बना था डमी कैंडिडेट
अलीगढ़, टोंक निवासी सियाराम मीना ने 15 लाख रुपए देकर डमी कैंडिडेट से SI भर्ती परीक्षा-2021 का पेपर पास करवाया था। डमी कैंडिडेट हनुमान प्रसाद मीणा (अलीगढ़, टोंक) तो पुलिस के हत्थे चढ़ गया था। लेकिन सियाराम मीना फरार था। पुलिस से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। SOG को सूचना मिली कि सियाराम इस बार खुद SI भर्ती परीक्षा देने आ रहा है। एसओजी ने पूरी डिटेल खंगाली। 5 अप्रैल को टोंक में एग्जाम सेंटर के बाहर परीक्षा देने से पहले ही उसे दबोच लिया। नवलकिशोर मीणा : ब्लूटूथ से की थी परीक्षा में नकल, 11 साल बाद पकड़ा
कनिष्ठ लेखाकार एवं तहसील राजस्व लेखाकार भर्ती परीक्षा-2015 में नवलकिशोर मीणा अपने सहयोगियों के साथ ब्लूटूथ किट पहन कर परीक्षा दी थी। खानपुर-दौसा का रहने वाला नवलकिशोर इस मामले में फरार चल रहा था। एसओजी को सूचना मिली कि आरोपी सेंटर में आकर परीक्षा देने का प्लान बना रहा है। उससे पहले ही दौसा से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह सफलता 11 साल बाद मिली। डमी कैंडिडेट से दिलवाए थे एग्जाम, 5 साल बाद 12 वांटेड एक साथ पकड़े बीएसटीसी (प्री. डीएलएड) भर्ती परीक्षा-2019-20 में 12 कैंडिडेट ऐसे थे, जिन्होंने खुद एग्जाम न देकर डमी कैंडिडेट बिठाकर एग्जाम पास करवाया था। इस मामले में ये वांछित थे। SOG के पास इनका रिकॉर्ड ऑनलाइन था। इस बीच एसओजी को पता चला कि 11 कैंडिडेट उदयपुर में और 1 कैंडिडेट भरतपुर में खुद सब इंस्पेक्टर भर्ती का एग्जाम देने के लिए आ रहे हैं। डीआईजी पारिस देशमुख की ओर से नकल रोकथाम व वांटेड की तलाश में टीमें भेजी गई थीं। टीमों ने 5 अप्रैल को एसआई भर्ती परीक्षा देने आए वांटेड 11 आरोपियों को उदयपुर और एक आरोपी रविन्द्र सिंह को भरतपुर से धर-दबोचा। इनकी एक साथ हुई गिरफ्तारी
प्री.डीएलएड भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े मामले में आरोपी जगदीश गमार (27) निवासी फलासिया उदयपुर, जीवतराम मोडिया (23) निवासी बाबलवाड़ा उदयपुर, लक्ष्मी कुमारी (30) निवासी फलासिया उदयपुर, मन्नालाल (26) निवासी फलासिया उदयपुर, मुकेश गमार (25) निवासी फलासिया उदयपुर, लोकेश कुमार (24) निवासी खेरवाड़ा उदयपुर हाल बावलवाड़ा उदयपुर, प्रेम कुमारी (25) निवासी झाड़ोल उदयपुर, राहुल बोड़ात (26) निवासी बाबलवाड़ा उदयपुर, संजय कुमार डामोर (27) निवासी बाबलवाड़ा उदयपुर, विक्रम कुमार (25) निवासी फलासिया उदयपुर, विशाल कुमार बोड़ात (29) निवासी बाबलवाड़ा, उदयपुर और रवींद्र सिंह मुसावत (28) निवासी वैर भरतपुर को अरेस्ट किया गया है। —————– ये खबरें भी पढ़िए…
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