चंडीगढ़ में 22 गांवों के किसान अब पक्का धरना लगाने की तैयारी में है। यह धरना गांव धनास के कम्युनिटी सेंटर के पास लगाया जाएगा। इसके लिए चंडीगढ़ के पिंडू विकास मंच की तरफ से हरियाणा एवं पंजाब के किसानों के साथ भी संपर्क किया जा रहा है और उनसे समर्थन की मांग की जा रही है। यह किसान पहले भी धरने लगा चुके हैं, लेकिन अब हरियाणा और पंजाब के किसानों की तर्ज पर पक्का धरना लगाया जाएगा। इन लोगों की मुख्य रूप से तीन मांग है। यहां समझिए किसानों की मांगें 1. लाल डोरा पॉलिसी खत्म की जाए ग्रामीण इलाके चंडीगढ़ नगर निगम के अधीन आ चुके हैं, लेकिन अभी भी यहां पर लाल डोरा पॉलिसी लागू की गई है। जिसके कारण लाल डोरे से बाहर बने मकानों को बिजली पानी के कनेक्शन और मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। इसलिए लाल डोरा पॉलिसी खत्म की जानी चाहिए। 2. पंजाब की तर्ज पर बने लैंड पूलिंग पॉलिसी पंजाब की तर्ज पर लैंड पूलिंग पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। अभी जो पॉलिसी है उसमें एक्वायर की जाने वाली जमीन के लिए सिर्फ मुआवजा दिया जाता है जिस कारण शहर का मुख्य निवासी उस इलाके से अलग हो जाता है। इसलिए जमीन के बदले प्लॉट या दुकान चंडीगढ़ शहर के अंदर दिया जाना चाहिए। 3. कलेक्टर रेट बढ़ाए जाए अभी जो कलेक्टर रेट बढ़ाए गए हैं, वह बहुत कम है। जिस हिसाब से महंगाई बड़ी है, उस हिसाब से कलेक्टर रेट नहीं बढ़ाए गए हैं। इसलिए उन्हें दोबारा से रिवाइज कर बढ़ाया जाए। एयरपोर्ट के लिए सड़क बनाने से शुरू हुआ विवाद चंडीगढ़ से एयरपोर्ट जाने के लिए एक नया वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जाना था। इसके लिए प्रशासन को जमीन एक्वायर करनी थी। लेकिन किसानों ने बिना लैंड पूलिंग पॉलिसी के जमीन देने से मना कर दिया था। यह विवाद करीब 2 साल तक चला था। अब समझिए चंडीगढ़ और पंजाब की पॉलिसी में अंतर 1. चंडीगढ़ में जमीन एक्वायर करने के बदले सिर्फ पैसा मिलता है, जबकि पंजाब में जमीन मालिक को प्लॉट और कमर्शियल दुकान देने का प्रावधान है। 2. चंडीगढ़ में मुआवजा कलेक्टर रेट से 1.25 गुना दिया जाता है जबकि पंजाब ने फेयर कंपेंसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी एक्ट में बदलाव करते हुए एक्वायर की गई जमीन का कंपेंसेशन रेट कलेक्टर रेट से 2 गुना कर दिया है। चंडीगढ़ के असली निवासियों को शहर से कर रहे दूर इस मामले में भाजपा पार्षद एवं पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह संधू का कहना है कि चंडीगढ़ प्रशासन की अभी जो पॉलिसी है उसके हिसाब से यह पैसा देकर चंडीगढ़ के मूल निवासी से उसकी जमीन तो ले लेते हैं लेकिन उसे यहां पर कोई जमीन नहीं दी जाती। जिससे वह चंडीगढ़ छोड़कर कहीं और ही शिफ्ट हो जाते हैं जो कि गलत है। हम चाहते हैं कि सिटी ब्यूटीफुल और भी ज्यादा ब्यूटीफुल बने लेकिन यहां के मुख्य निवासियों का ध्यान रखा जाए। चंडीगढ़ भले ही अर्बन इलाका है लेकिन रेवेन्यू रिकॉर्ड के अनुसार अभी भी चंडीगढ़ में 1000 लोगों के नाम पर करीब 3000 एकड़ जमीन मौजूद है।
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