पोर्टल के फेर में उलझा गांव:शिक्षा विभाग के टूर्नामेंट में सबकी एंट्री, पर CBSE स्कूलों के ग्राउंड में सरकारी स्कूलों के बच्चों को ना




प्रदेश के स्कूली खेल तंत्र में ऐसी विसंगति सामने आई है, जो सीधे तौर पर सरकारी स्कूलों के होनहार खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। खेल के मैदान पर समान अवसर की बात करने वाला शिक्षा विभाग खुद एकतरफा नियम का शिकार है। विडंबना यह है कि राज्य शिक्षा विभाग की खेल प्रतियोगिताओं में सीबीएसई स्कूलों के विद्यार्थी तो खुलकर हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन जब बारी सीबीएसई की प्रतियोगिताओं की आती है तो सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। समन्वय की इस कमी के कारण गांवों और सरकारी स्कूलों की हजारों प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर के एक बड़े मंच से वंचित रह जाती हैं। प्रतियोगिताएं पूरी तरह इनके अपने पोर्टल पर पंजीकरण के आधार पर होती हैं। चूंकि राज्य के सरकारी स्कूल इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड नहीं हैं, इसलिए वहां के छात्र चाहकर भी इन स्पर्धाओं में भाग नहीं ले पाते। वहीं सीबीएसई स्कूलों के छात्र यू-डाइस पोर्टल पर पंजीकृत होने के कारण शिक्षा विभाग की खेल प्रतियोगिताओं में आसानी से हिस्सा ले लेते हैं। नुकसान… प्रतिभाओं का गला घोंट रही यह पेचीदगी राजस्थान के गांवों में एथलेटिक्स, कबड्डी और फुटबॉल की बेहतरीन प्रतिभाएं हैं। सीबीएसई का क्लस्टर और नेशनल लेवल एक बड़ा एक्सपोजर देता है, जिससे सरकारी स्कूल के बच्चे वंचित हैं। सरकारी स्कूल के टूर्नामेंट्स में निजी और सीबीएसई स्कूलों के आने से प्रतियोगिता बढ़ जाती है, लेकिन सरकारी बच्चों को वह अनुभव लेने के लिए दूसरे मंच नहीं मिल रहे। सीबीएसई का ढांचा देशभर में फैला है। वहां खेलने से खिलाड़ियों को जो राष्ट्रीय पहचान मिल सकती है, वह केवल राज्य स्तरीय सिस्टम तक सीमित होकर रह जाती है। जिम्मेदार ये बोले सरकार से आग्रह करेंगे : डीईओ
यहां के खिलाड़ियों को सीबीएसई की प्रतियोगिताओं में मौका नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि गांवों की प्रतिभाओं को यह मंच मिले तो वे बहुत आगे जा सकते हैं। हम सरकार से आग्रह करेंगे कि सरकारी स्कूली बच्चों को भी इस पोर्टल पर पंजीकरण का अधिकार मिले।
-डॉ. लोकेश भारती, जिला शिक्षा अधिकारी-माध्यमिक, उदयपुर सीबीएसई से बात करे सरकार ‌
यह स्पष्ट रूप से एक बड़ी विसंगति है। राज्य सरकार को सीबीएसई के साथ समन्वय स्थापित कर करना चाहिए, ताकि सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी उनके पोर्टल पर पंजीकरण मिले और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं से जुड़ सकें।
-डॉ. भैरूसिंह राठौड़, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शारीरिक शिक्षक संघ



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