मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता द्वारा मजदूरों पर लाठियां बरसाकर उनकी हडि्डयां तोड़ देने का मामला अफसरों ने जांच के बहाने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। मुरादाबाद के कमिश्नर और एमडीए बोर्ड के अध्यक्ष आन्जनेय सिंह ने मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का दावा किया था, लेकिन घटना के 50 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने आरोपी जेई के खिलाफ FIR तक दर्ज नहीं की है। हालांकि, कमिश्नर के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ ने मौके पर जाकर जांच जरूर की थी। पीड़ित मजदूरों से लेकर आरोपी जेई तक के बयान दर्ज किए गए थे। लेकिन आपराधिक कृत्य होने के बावजूद मामले में पुलिस की ओर से अभी तक प्राथमिकी दर्ज नही की गई है। सूत्रों का कहना है कि सीनियर प्रशासनिक अफसरों के निर्देश पर जेई को कार्रवाई से बचाया जा रहा है।
इस मामले में सामने आया वीडियो पहले ही मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी अनुभव सिंह यादव की फजीहत करा चुका है। वीसी ने जेई देवेंद्र यादव के बचाव में कहा था कि एमडीए के जेई कभी डंडा लेकर नहीं चलते हैं। सामने आए वीडियो में जेई देवेंद्र यादव डंडा लेकर लोगों को धमकाते नजर आ रहे हैं। 27 फरवरी को एमडीए जेई ने ठेकेदार और मजदूरों को पीटा था बता दें कि 27 फरवरी को देर शाम दिल्ली रोड पर सीएनजी पंप के सामने बिल्डिंग निर्माण कर रहे ठेकेदार सुनील सागर और उसके मजदूरों पर एमडीए जेई देवेंद्र यादव ने डंडे बरासाए थे। सुनील सागर का आरोप है कि जेई डंडा लेकर छत पर चढ़े और उन्होंने सीधे मजदूरों को डंडों से पीटना शुरू कर दिया। जेई की मारपीट से एक मजदूर लेखराज निवासी इटायाला माफी के हाथ की हड्डी टूट गई। जबकि दूसरा मजदूर सोनू निवासी बागड़पुर को जेई ने डंडों से पीटते-पीटते छत से नीचे गिरा दिया। हादसे में जेई की दोनों टांगों में फ्रैक्चर हुआ है। सुनील सागर का आरोप है कि जेई ने उसे भी बेरहमी से पीटा और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए भद्दी गालियां दी। शहर के नामी आर्किटेक्ट के करीबी की दुकानें बना रहे थे मजदूर मामला दिल्ली रोड पर पाकबड़ा थाना क्षेत्र में हो रहे आनंद शर्मा और जसवीर सिंह के निर्माणों से जुड़ा है। दोनों यहां 70-70 मीटर में अपनी दुकानें बना रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि आनंद शर्मा और जसवीर सिंह शहर के एक नामी आर्किटेक्ट के करीबी हैं। इनमें से एक आनंद शर्मा पेंट का काम करता है। आर्किटेक्ट के पेंट के सभी काम आनंद शर्मा ही करता है। सूत्र बताते हैं कि इसी आर्किटेक्ट की शह पर यह निर्माण कार्य हो रहे थे। यह आर्किटेक्ट शहर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कराने के लिए बदनाम है। प्राधिकरण में अच्छी सेटिंग होने की वजह से आर्किटेक्ट बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए मशहूर है। आर्किटेक्ट का पिता सत्ताधारी दल के अनुसांगिक संगठन का अहम पदाधिकारी है।
बुलडोजर चलाते या सील करते, डंडे बरसाने का क्या अधिकार ठेकेदार सुनील सागर का कहना है कि, यदि निर्माण को लेकर कोई शिकायत थी तो प्राधिकरण की टीम आनंद शर्मा या जसवीर सिंह से बात करती। निर्माण अवैध था तो सील कर देते, या फिर बुलडोजर चलाते। हमें भला इससे क्या मतलब है। हम तो कांट्रेक्ट लेकर बिल्डिंग बना रहे हैं। जिस दिन से एमडीए ने सील लगा दी, हम उधर झांकने भी नहीं गए। ऐसे ही हमसे पहले मना कर देते तो हम तो खुद ही मालिक से मना कर देते कि हम काम नहीं करेंगे। लेकिन जेई साहब ने आते ही डंडे बरसाने शुरू कर दिए। पहले भी तीन बार आकर पैसे मांगे थे। हम भला क्यों जेई को पैसे देते। पैसे देता तो मालिक देता। मालिक मौके पर होता नहीं था और हमसे पैसे की डिमांड करते थे। कहते थे हरेक कंस्ट्रक्शन का हिसाब-किताब ऊपर तक देना होता है। ठेकेदार ने जेई पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपमानित करने का आरोप भी लगाया है।
वीसी का करीबी है जेई, कई अहम चार्ज संभाले है दरअसल मजदूरों के हाथ-पैर तोड़ने का आरोपी जेई देवेंद्र यादव मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी अनुभव यादव का करीबी है। शायद यही वजह है कि उसे आरबीओ जैसे महत्वपूर्ण कार्य के साथ-साथ सहायक संपत्ति अधिकारी का भी अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। इसके अलावा उसके पास दूसरे भी कुछ चार्ज बताए जा रहे हैं। इतना फजीहत होने के बाद भी अधिकारी जिस तरह जेई को बचाने की कोशिशों में जुटे हैं उससे वो खुद कठघरे में आ खड़े हुए हैं। मजदूर बोले-मालिक को पीटते, हमारे हाथ-पैर क्यों तोड़े मुरादाबाद विकास प्राधिरण के जेई की पिटाई की वजह से जिन गरीब मजदूरों के हाथ-पैर टूटे हैं, उनकी होली भी अस्पताल में ही गुजरी। बिल्डिंग मालिक आनंद शर्मा और जसवीर की ओर से भी उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई। कर्ज-पानी करके दोनों अपना इलाज करा रहे हैं। सोनू का मेजर ऑपरेशन सिद्ध अस्पताल में हुआ है। जेई की पिटाई से उसकी टांगों में 5 जगह फ्रैक्वचर हुआ है। इन गरीब मजदूरों के हाथ-पैर तोड़ दिए जाने की वजह से इनकी रोजी रोटी भी लंबे समय के लिए छिन गई है। उल्टा इलाज का बोझ भी इन गरीबों पर आन पड़ा है। सोनू और लेखराज ने कहा- हम तो गरीब मजदूर हैं। 300-400 रुपए की दिहाड़ी पर मजदूरी करके परिवार का जैसे तैसे पेट पालते हैं। हमें क्या पता बिल्डिंग का नक्शा पास है या नहीं, सही बन रही है या गलत। हमें तो जो भी काम पर ले जाता है वहां चले जाते हैं। सुबह से शाम तक काम किया अपनी दिहाड़ी ली और राशन पानी लेकर घर लौट गए। उस दिन हम छत पर काम कर रहे थे। जेई साहब आए और बिना कुछ कहे सुने हम पर डंडे बरसाने शुरू कर दिए। हमसे मना करते तो हम तो वैसे ही काम रोक देते। हमें भला क्या, मालिक जाने और वो अफसर जानें। मजदूर कहते हैं- जेई साहब में इतना ही दम था तो मालिक पर डंडे बरसाते। हमारे हाथ पैर क्यों तोड़ दिए।
जिला पंचायत के नक्शों की आड़ में अवैध निर्माणों का बड़ा खेल
दरअसल पूरा खेल जिला पंचायत से पास नक्शों की आड़ में खेला जा रहा है। जिला पंचायत के पास नक्शों के आधार पर ही दिल्ली रोड पर एमडीए अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों बीघा में अवैध निर्माण हो गए हैं। बड़ी-बड़ी फैक्ट्री्, मॉल, शापिंग कांप्लेक्स, होटल और अस्पताल बना दिए गए हैं। इससे एमडीए को अरबों रुपए के विकास शुल्क की हानि हुई है। हाल ही में आईएफटीएम यूनिवर्सिटी के पास बर्गर किंग के पीछे करीब 30 बीघा जमीन में बेसमेंट और कंस्ट्रक्शन का कार्य जिला पंचायत के नक्शे पर ही चल रहा है। लोधीपुर में हाईवे किनारे 15 बीघा जमीन में महेंद्रा का शोरूम बनाया जा रहा है। ये सब जिला पंचायत के नक्शे के आधार पर हो रहा है। इनमें से किसी के भी पास एनएचएआई की एनओसी तक नहीं है। आपसी अंडरस्टैंडिंग होने के कारण एमडीए अधिकारी भी इन बड़े-बड़े निर्माणों की ओर नजर उठाकर नहीं देखते। लेकिन जब कोई गरीब छोटा मोटा निर्माण करता है तो उसे अवैध बताकर कार्रवाई कर दी जाती है। जिस निर्माण को अवैध बताकर एमडीए जेई देवेंद्र यादव ने मजदूरों के हाथ-पैर तोड़ डाले उसका मानचित्र भी जिला पंचायत से स्वीकृत है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जिला पंचायत के नक्शे को वैध मानकर एमडीए बडे़-बड़े निर्माण होने दे रहा है तो फिर 70-70 मीटर के छोटे निर्माणों में अड़ंगा क्यों ? जब हाईवे किनारे सैकड़ों बीघे के निर्माणों पर NHAI की एनओसी नहीं मांगी जा रही तो 70 मीटर के निर्माणों से क्यों मांगी जा रही है?
ये सवाल एमडीए अधिकारियों को कठघरे में खड़ा करते हैं। शायद यही वजह है कि एमडीए अधिकारियों पर बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर भ्रष्टाचार संगीन आरोप लग रहे हैं।
इस मामले में एमडीए वीसी अनुभव सिंह से जेई पर हुई कार्रवाई की बाबत सवाल किया गया, लेकिन फिलहाल उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया है।
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