राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का फर्जी पत्र वायरल करने के मामले में आरोपी बनाए गए कांग्रेस की आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं ने जबलपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। जिस पर आज (बुधवार को) चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा
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याचिका में कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को गलत बताते हुए न्याय की गुहार लगाई गई है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से वायरल कथित पत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह पत्र सोशल मीडिया पर था, जिसे कांग्रेस की आईटी सेल ने साझा किया। जिसे बाद में फेक बताया गया। इसके बाद भोपाल साइबर पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल के निखिल, बिलाल और इनाम को हिरासत मे लिया था। आज होने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में राज्य सरकार, एसपी भोपाल और साइबर पुलिस को पक्षकार बनाया गया है।
तन्खा ने कार्रवाई को बताया गैर कानूनी
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया था। सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने भी इस मामले पर बयान जारी करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए इसे गैरकानूनी बताया था। तन्खा का कहना था कि बीते 30 घंटों से साइबर पुलिस भोपाल ने आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को बिना किसी वाजिब कारण के हिरासत में रखा है।
उन्होंने कहा कि वसुंधरा राजे की तथाकथित ट्वीट जो लाखों लोगों ने देखी है और शेयर की है। 15-16 अप्रैल से लाखों लोगों के बीच पब्लिक सर्कुलेशन में थी। 18 अप्रैल शाम लगभग 8 बजे उन्होंने फर्जी पत्र बताकर पोस्ट किया और फिर इसी आधार पर साइबर पुलिस ने कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को पकड़ लिया, जो सही नहीं है।
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भोपाल में कांग्रेस IT सेल के 3 वर्कर्स हिरासत में
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर MP कांग्रेस आईटी सेल के 3 कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में हैं। इनमें निखिल, बिलाल और इनाम शामिल हैं। इसकी जानकारी कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने फेसबुक के माध्यम से दी है। पढ़ें पूरी खबर…