हरियाणा का नूंह बना राजस्थान के ऊंटों की कब्रगाह:कैमरे पर बोला तस्कर- काटने के लिए ले जाते हैं, 2-3 हजार में खरीदते हैं




राजस्थान के राज्य पशु ऊंटों को हरियाणा ले जाकर बेरहमी से काटा जा रहा है। तमाम कानूनी पाबंदियों के बावजूद ऊंटों की तस्करी हो रही है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि अलवर, दौसा, जयपुर ग्रामीण, करौली-गंगापुर सिटी में कई गिरोह एक्टिव हैं। रात के अंधेरे में गांव-ईंट भट्टों से ऊंट चोरी करते हैं। कई जगह ऊंट पालकों से 1500-2000 में खरीदकर ट्रकों में ठूंसकर हरियाणा के नूंह इलाके में ले जाते हैं। पेड़ों से रस्सियों के जरिए बांधकर रखा जाता है। यातनाएं देने के बाद सालंबा-घासेड़ा में अवैध बूचड़खानों में ऊंटों को काट दिया जाता है। बीते तीन माह में ऊंट तस्करी के 5 से अधिक मामले पकड़े जा चुके हैं। आलम यह है कि बीते 20 साल में ऊंटों की संख्या 5 गुना घट चुकी है। दैनिक भास्कर की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन, पुलिस FIR, एक्सप्रेस-वे पर कार्रवाई और पकड़े गए तस्करों के ऑन-कैमरा कबूलनामों ने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. सबसे पहले हाल ही में हुई 5 कार्रवाई के बारे में जानते हैं… 1. जयपुर का मौखमपुरा, 10 जनवरी 2026
जयपुर ग्रामीण जिले के मौखमपुरा थाना पुलिस ने ऊंट तस्करी का बड़ा गिरोह पकड़ा। नेशनल हाईवे-48 पर सावरदा पुलिया के पास से 13 ऊंटों को मुक्त कराया और तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। तस्कर ऊंटों को बाड़मेर के एक मेले से बिना किसी कागजात के खरीद कर लाए थे। नूंह ले जा रहे थे। 2. अलवर का राजगढ़, 15 फरवरी 2026
अलवर के मूनपुर पुलिया पर पुलिस ने हरियाणा नंबर की पिकअप को रोका। उसमें 3 ऊंट भरे हुए थे। ड्राइवर तारिक खान, अयूब खान और अरबाज खान वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके। मौके पर ही गाड़ी जब्त कर ऊंटों को मुक्त कराया गया। 3. अलवर का गोविंदगढ़, 17 मार्च 2026
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध गाड़ी को रोका गया। उसमें 1 ऊंट की तस्करी की जा रही थी। वाहन को जब्त कर ऊंट को सुरक्षित छुड़ाया गया, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया था। गोविन्दगढ़ थानाधिकारी धर्म सिंह ने बताया कि फरार चल रहे आरोपी अनीश पुत्र रहमत मेव को 9 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया था। आरोपी के पास ऊंट की खरीद से संबधित कोई कागज उपलब्ध नहीं थे। 4. कोटपूतली का सरुंड, 22 मार्च 2026
कोटपूतली के सरुंड थाना पुलिस ने 27 ऊंट-ऊंटनियों को मुक्त कराया था। साथ ही, दो आरोपी गिरफ्तार भी हुए थे। जब्त ट्रक से पशु बिना दस्तावेज मिले। आरोपी तालीम (23) निवासी मेवात, हरियाणा और कामील (27) निवासी मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश रस्सियों से बांधकर ऊंटों को हरियाणा के नूंह ले जा रहे थे। 5. नूंह में कटने को तैयार थे राजस्थान से खरीदे गए 14 ऊंट
14 अप्रैल को नूंह जिले के गांव सालंबा में पुलिस ने छापेमारी कर ऊंट कटान के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया। इस दौरान 13 ऊंट और एक ऊंटनी सहित कुल 14 पशुओं को अमानवीय स्थिति में बरामद किया गया। ऊंटों को कीकर के पेड़ों से अलग-अलग रस्सियों से बांधकर रखा गया था। सभी पशु बेहद कमजोर और बुरी हालात में थे। पुलिस ने भी स्वीकार किया- नूंह में बड़े पैमाने पर कटान होता है
भास्कर ने इस केस में नूंह थाने के जांच अधिकारी सत्यनारायण से बात की। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने कबूला है कि नूंह के सालंबा गांव में रेस्क्यू किए गए सभी 14 ऊंट राजस्थान से ही खरीदकर लाए गए थे। हालांकि, इन्हें किन-किन जगहों से लाया गया, इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया नूंह क्षेत्र के सालंबा-घासेड़ा गांव में ऊंटों को बड़े पैमाने पर काटा जाता है। कैमरे पर बोला ड्राइवर- ऊंटों को काटने ले जा रहे हैं
मामले की पड़ताल के दौरान भास्कर टीम के हाथ एक अहम वीडियो लगा। 3 ऊंटों को पिकअप में भरकर हरियाणा ले जा रहे ड्राइवर राजेंद्र ने कैमरे पर साफ तौर पर कबूल किया कि ऊंटों को सालंबा ले जा रहा था। जब उससे सवाल किया गया कि ऊंट किस काम से ले जा रहा है तो उसने कबूला कि इन्हें काटने के लिए ले जा रहा है। राजगढ़ थाना प्रभारी राजेश कुमार मीणा ने बताया- जनवरी से अब तक थाना क्षेत्र में 2-3 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। ज्यादातर मामलों में आरोपियों ने बताया कि ऊंटों को तस्करी कर नूंह की तरफ ले जाया जाता है। प्रारंभिक जांच में अधिकांश मामलों में ऊंटों को कटान के लिए ले जाने की बात सामने आती है। हर एंगल से मामले की जांच की जा रही है। ग्राउंड रिपोर्ट: चराई की कमी और महंगा चारा, तस्करों का डर
भास्कर पड़ताल में सामने आया कि जयपुर ग्रामीण और दौसा बेल्ट से ऊंटों की तस्करी होती है। हकीकत जानने के लिए टीम जयपुर के कानोता क्षेत्र के पापड़ गांव पहुंची। गांव में ऊंट पालक गिर्राज से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया- परिवार तीन पीढ़ियों से ऊंट पालन करता आ रहा है। पहले ऊंट आजीविका का मुख्य साधन थे, लेकिन अब इसे पालना बोझ बनता जा रहा है। गिर्राज ने बताया उनके पास 30 से 40 ऊंट हैं, लेकिन उन्हें संभालना अब मुश्किल होता जा रहा है। चराई के दौरान ऊंट इधर-उधर फैल जाते हैं। हर समय यह डर बना रहता है कि ऊंट कहीं गायब न हो जाएं। कई बार ऊंट चोरी या उठाने की कोशिश की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं हो पाती। रात के अंधेरे में तस्कर सक्रिय होते हैं। उनकी पहचान करना मुश्किल होता है। पुलिस भी बिना ठोस जानकारी के कार्रवाई नहीं कर पाती। ऐसे में पशुपालक नुकसान सहकर चुप रह जाते हैं। ईंट भट्टों से कमजोर ऊंटों की सस्ते में डील
पड़ताल में सामने आया कि बाहरी लोग गांवों में आते हैं और बूढ़े, बीमार या घायल ऊंटों को सस्ते दामों में खरीदने की कोशिश करते हैं। पशुपालकों को आशंका रहती है कि ये ऊंटों को कटान के लिए ले जाते हैं। कुछ लोग इनसे बचते हैं, लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते कई लोग सौदा कर लेते हैं। जयपुर के ही नायला क्षेत्र में एक ईंट भट्टे पर पांच ऊंट बंधे हुए थे। उनकी देखभाल करने वाले एक युवक ने बताया कि इनमें से केवल एक ऊंट उसका है, जबकि बाकी अलग-अलग परिवारों के हैं। युवक ने बताया कि बहुत बार बाहर से गाड़ियां लेकर ऊंटों के खरीदार आते हैं। ऊंटों की स्थिति देखकर उन्हें सस्ते में खरीद लेते हैं। युवक ने बताया कि एक ऊंट के चारे का खर्च 1800 से 1900 रुपए प्रति बोरा पड़ता है। इसके अलावा पानी और देखभाल का खर्च अलग है। बारिश के मौसम में जब काम बंद हो जाता है, तो आमदनी पूरी तरह खत्म हो जाती है। ऐसे में ऊंट को पालना मुश्किल हो जाता है और मजबूरी में उसे सस्ते में बेच दिया जाता है या खुला छोड़ दिया जाता है। यही आर्थिक दबाव तस्करों के लिए सबसे बड़ा अवसर बन जाता है। 70% तक घटी ऊंटों की संख्या
राजस्थान में ऊंटों की संख्या पिछले कुछ दशकों में तेजी से घटती जा रही है। अब यह एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। वर्ष 1983 में जहां राज्य में 7.5 लाख से ज्यादा ऊंट थे। 2012 की पशुगणना में यह संख्या घटकर लगभग 3.25 लाख रह गई। इसके बाद गिरावट का सिलसिला और तेज हुआ और 2019 की पशुगणना में ऊंटों की संख्या घटकर करीब 2.13 लाख तक पहुंच गई। हाल के अनुमानों के अनुसार यह आंकड़ा अब डेढ़ से दो लाख के बीच सिमटता नजर आ रहा है। इन आंकड़ों से साफ है कि पिछले 30 से 40 साल में राजस्थान में ऊंटों की संख्या 70 प्रतिशत से ज्यादा कम हो चुकी है। राजस्थान के कई जिलों से होती है ऊंट का तस्करी
राजस्थान में ऊंट तस्करी के लिए दौसा (लालसोट), जयपुर ग्रामीण (बस्सी, कानोता) और करौली-गंगापुर बेल्ट को जहां ऊंटों का मुख्य सोर्स एरिया माना जा रहा है, वहीं बाड़मेर और जैसलमेर जैसे पश्चिमी जिले भी अब इस नेटवर्क में जुड़ते नजर आ रहे हैं। यहां से ऊंटों को तस्करी के लिए खरीदा जाता है। इसके बाद इन्हें अलवर (राजगढ़, तिजारा, बहरोड़) और भरतपुर-डीग जैसे बॉर्डर जिलों के रास्ते हरियाणा भेजा जाता है, जिससे यह पूरा राज्य एक बड़े तस्करी कॉरिडोर में बदलता जा रहा है। आखिर क्यों होती है ऊंटों की तस्करी?
नूंह में कई जगह अवैध बूचड़खाने (स्लॉटर हाउस) हैं, जहां मवेशियों को काटकर उनके मांस से लेकर हड्डियां तक बेची जाती हैं। ऊंटों की तस्करी का यह पूरा नेटवर्क मुनाफे के हिसाब से ही चलता है… 1. सस्ते में खरीद, महंगे में सप्लाई
पुलिस जांच और ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, गांवों से ऊंट 1500-3000 रुपए में खरीदे जाते हैं। तस्करों की नजर बूढ़े और कमजोर हो चुके ऊंटों पर रहती है। कई बार चोरी कर लिए जाते हैं। इसके बाद इन्हें हरियाणा या दूसरे इलाकों में कई गुना कीमत पर बेचा जाता है। 2. कटान से बड़ा मुनाफा
तस्करों से खरीदने के बाद बूचड़खाना चलाने वाले ऊंटों को काटते हैं। फिर इनका मांस, चमड़ा और अन्य हिस्से अलग-अलग बेचते हैं। इसमें उन्हें मोटा मुनाफा होता है। ऊंट को दूसरे राज्य ले जाने पर भी जरूरी है कलेक्टर की परमिशन
एडवोकेट बिसमात कौर बताती हैं- राजस्थान में ऊंट तस्करी और कटान को रोकने के लिए राजस्थान ऊंट (वध निषेध और निर्यात विनियमन) अधिनियम, 2015 लागू है। इस कानून के तहत ऊंट का कटान पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही, ऊंट का मांस रखना, बेचना या लाना-ले जाना भी अपराध माना गया है। बिना कलेक्टर की अनुमति ऊंट को राज्य से बाहर ले जाना भी गैरकानूनी है। ऐसे मामलों में शामिल आरोपी- चाहे ड्राइवर हो या मालिक- सभी पर कार्रवाई होती है। कानून के तहत ऊंट तस्करी या कटान करने पर 1 से 5 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है, जबकि अवैध परिवहन या नियमों के उल्लंघन पर भी जेल और जुर्माने का प्रावधान है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *