कानपुर देहात में भाजपा की सिकंदरा विधानसभा इकाई ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर मानपुर, सिकंदरा में एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल और राज्यमंत्री अजीत पाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर का कांग्रेस ने जीवनभर सम्मान नहीं किया और उन्हें संविधान सभा में आने से रोकने का प्रयास किया गया। प्रकाश पाल ने आरोप लगाया कि अंबेडकर को बंगाल कोटे से संविधान सभा में जाना पड़ा, क्योंकि कांग्रेस नहीं चाहती थी कि वे संविधान निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रयासों से बाबा साहब को पुनः अवसर मिला, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें चुनाव में हराने का प्रयास किया। 1952 और 1954 के चुनावों में भी कांग्रेस ने उन्हें पराजित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। हिंदू कोड बिल का जिक्र करते हुए प्रकाश पाल ने बताया कि यह बिल समानता का अधिकार देता था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसे पारित नहीं किया। इससे आहत होकर बाबा साहब ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आगे कहा कि बाद में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहल से वर्ष 1990 में अंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया और उनके सम्मान में पंचतीर्थ विकसित किए गए। समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए पाल ने आरोप लगाया कि सपा शासन में अराजकता का माहौल था और पुलिस थानों पर गुंडों का कब्जा रहता था। उन्होंने सपा के ‘पीडीए’ पर भी तंज कसते हुए कहा कि इसका वास्तविक अर्थ ‘पावर ऑफ डिंपल अखिलेश’ है। राज्यमंत्री अजीत पाल ने अपने संबोधन में बाबा साहब अंबेडकर को एक दूरदर्शी नेता बताया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने समाज के दबे-कुचले वर्ग को सम्मान दिलाने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। पाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों ने उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया, जबकि भाजपा सरकार ने उनके योगदान को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में जिला महामंत्री सुमित दिवाकर, अखिलेश सोनकर, राकेश तिवारी, क्रांतिवीर सिंह, मोहित दुबे, विनय तिवारी, राजन शुक्ला, उमेश बाबू कुशवाहा, कुलदीप सिंह, अजय दीक्षित, विकास मिश्रा (जिला मीडिया प्रभारी) सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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