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खालसा साजना दिवस, यानी बैसाखी के पावन अवसर पर हर साल की तरह इस वर्ष भी सिख श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए रवाना हो रहा है। यह यात्रा श्रद्धा, आस्था और इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है। आज श्रद्धालुओं को उनके पासपोर्ट अमृतसर स्थित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, यानी एसजीपीसी के दफ्तर से प्राप्त होंगे। इसके बाद सभी श्रद्धालु पूरी तैयारी के साथ कल 10 अप्रैल को एसजीपीसी कार्यालय से रवाना होंगे। इस मौके पर जयकारों की गूंज, बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जैकारे के साथ वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन से जुड़ेगी आस्था और विरासत यह जत्था वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करेगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालु सबसे पहले गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब, हसन अब्दाल पहुंचेंगे, जहां खालसा साजना दिवस का मुख्य समागम बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक स्थल का सिख इतिहास में विशेष महत्व है, और यहां दर्शन करना हर श्रद्धालु के लिए एक सौभाग्य माना जाता है। इसके अलावा जत्था पाकिस्तान में स्थित अन्य प्रमुख गुरुद्वारों के भी दर्शन करेगा, जहां गुरु साहिबानों की पवित्र यादें जुड़ी हुई हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि सिख इतिहास और विरासत से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करती है। 19 अप्रैल को जत्थे की वापसी जे जत्था आध्यात्मिक यात्रा के बाद,19 अप्रैल को भारत वापस लौटेगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने साथ न केवल पवित्र यादें, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और गुरु साहिबानों की कृपा भी लेकर आएंगे।
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