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कहने को तो उदयपुर का आरएनटी मेडिकल कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां सिस्टम मरीजों का इलाज करने से ज्यादा उन्हें थकाने और परेशान करने में लगा है। हालात ये हैं कि महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल से सुपरस्पेशलिटी (एएस) अस्पताल की दूरी महज 150 कदमों की है, लेकिन यदि एक मरीज को इन दोनों जगहों पर अलग-अलग डॉक्टरों को दिखाना हो तो उसे दो बार लंबी कतारों में लगकर दो अलग-अलग पर्चियां बनवानी पड़ती हैं। यह सिर्फ कागज की बर्बादी नहीं, बल्कि उस मरीज के साथ क्रूरता से कम नहीं, जो पहले से ही बीमारी से त्रस्त है। आरएनटी प्रशासन ने ‘एक ही पर्ची से सभी अस्पतालों में उपचार’ का जो सपना दिखाया था, वह आज भी फाइलों की धूल फांक रहा है। इन हालात में सवाल यह है कि जब मरीज एक ही आरएनटी मेडिकल कॉलेज के बैनर तले इलाज करा रहा है तो उसे बार-बार लाइनों में क्यों झोंका जा रहा है? क्या प्रशासन किसी बड़े हंगामे का इंतजार कर रहा है या फिर डिजिटल इंडिया का नारा यहां के अस्पतालों की दहलीज पर दम तोड़ रहा है? आरएनटी के 6 प्रमुख अस्पतालों में रोजाना की ओपीडी करीब 9,590 है। यदि केवल 10 प्रतिशत मरीजों को भी ऐसा मानें, जिन्हें एक से अधिक अस्पताल या विशेषज्ञों को दिखाना पड़ता है तो करीब 1,000 मरीजों का आधा दिन सिर्फ पर्ची की लाइन में गुजर जाता है। भास्कर सवाल – जब सॉफ्टवेयर में समाधान तो सिस्टम को परेशानी क्यों? विशेषज्ञों के अनुसार इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम (आईएचएमएस) सॉफ्टवेयर में यह सुविधा पहले से मौजूद है। बस इसे लागू करने की जरूरत है। क्योंकि मल्टी डिपार्टमेंट एंट्री के तहत ऑपरेटर एक ही बार में मरीज के पर्चे पर फिजिशियन और सुपरस्पेशलिस्ट दोनों का नाम दर्ज कर सकता है। यानी मरीज को दोबारा लाइन में लगने की जरूरत ही नहीं। दूसरा इंटरनल रेफरल के तहत यदि एमबी अस्पताल का डॉक्टर चाहे तो अपने कम्प्यूटर से सीधे मरीज को एसएसबी के लिए रेफर कर सकता है। ऐसे में मरीज का रिकॉर्ड वहां खुद-ब-खुद पहुंच जाएगा। तीसरा विकल्प डिजिटल कतार का है। सॉफ्टवेयर हर डॉक्टर की लिस्ट अलग मैनेज करता है। बस सिस्टम में नाम एक्टिव करने की देरी है। सभी अस्पताल व प्रक्रिया अलग-अलग
“यह इसलिए संभव नहीं हो पा रहा क्योंकि सभी अस्पताल अलग-अलग हैं। काउंटिंग का फर्क होता है और जनरल ओपीडी व सुपरस्पेशलिटी की प्रक्रिया अलग है। बाहरी अस्पतालों में तकनीकी दिक्कतें हैं।”
-डॉ. आरएल सुमन, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल सिस्टम लागू करने के ठोस प्रयास करेंगे
“एक ही पर्ची से आरएनटी के सभी अस्पतालों में उपचार संभव होने से मरीजों का समय बचेगा और कागज की बर्बादी रुकेगी। हम इस सिस्टम को लागू करने के लिए ठोस प्रयास करेंगे।”
-डॉ. राहुल जैन, प्रधानाचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज
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