एमबीएस अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार की देर रात मरीज के परिजनों ने ईसीजी स्टाफ को पीट दिया, जिसके बाद माहौल गर्मा गया। रात करीब 11 बजे हुई इस घटना के बाद इमरजेंसी के सभी नर्सिंगकर्मी, डॉक्टर अन्य स्टाफ बाहर आ गए और कुछ देर के लिए इमरजेंसी सेवाएं ठप कर दीं। नयापुरा थाने से पुलिस जाब्ता और अस्पताल अधीक्षक डॉ धर्मराज मीणा भी मौके पर पहुंचे और समझाइश करके फिर से काम शुरू करवाया। हुआ यूं कि करीब 60 वर्षीय महिला रोगी की इमरजेंसी में डॉक्टरों ने ईसीजी लिखी थी। ईसीजी स्टाफ विष्णु प्रकाश ने बताया, जैसे ही महिला को लाया गया तो मैंने एंट्री की और पूछा कि कोई महिला अटेंडेंट हैं या नहीं? उनके साथ महिला अटेंडेंट थी तो उनको अंदर ले लिया और कपड़ों को लेकर जरूरी निर्देश दिए तो साथ मौजूद महिला अटेंडेंट ने कपड़े उसी अनुरूप कर दिए। मैंने ईसीजी करके रिपोर्ट दे दी, इसी बीच उनके परिजन बाहर आ गए और गलत हरकत का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया और मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी। मुझे बेरहमी से पीटते हुए अस्पताल के बाहर तक ले आए और फिर पीटते हुए ही फिर से इमरजेंसी ड्यूटी डॉक्टरों तक लेकर गए। वहां मौजूद डॉक्टरों से भी इन्होंने हाथापाई की। बाद में जब पुलिस आई तो उनको पकड़ा और मामला शांत कराया। 30 मिनट तक इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित रही, इस दौरान अन्य मरीज और उनके परिजन इलाज के लिए स्टाफ और डॉक्टरों से अनुरोध करते रहे। उधर, नयापुरा थाने में मौजूद मरीज के परिजनों ने स्टाफ पर गलत हरकत का आरोप लगाया। ईसीजी स्टाफ विष्णु प्रकाश ने बताया की मरीज के साथ महिला अटेंडेंट थीं। मैंने पेशेंट के चेस्ट तक कपड़े ऊपर करने को कहा। उन्होंने ऊपर कर दिए, उसके बाद मैंने जांच की। इसके बाद उन्होंने मुझ पर छेड़खानी का इल्जाम लगाया। महिला मरीज की उम्र करीब 60 वर्ष थी। उनके साथ कई सारे लोग थे, मेरे साथ मारपीट की। मैं इमरजेंसी में डॉक्टरों के पास जाने लगा तो वहां गेट से ही मारते-पीटते बाहर तक ले आए। पुलिस चौकी तक ले आए, फिर चौकी से मारते हुए वापस गेट तक ले गए। अधीक्षक डॉ धर्मराज मीणा ने बताया की मुझे सीएमओ ड्यूटी डॉक्टर का फोन आया कि ईसीजी वाले की भयंकर पिटाई कर दी किसी अटेंडेंट ने ईसीजी करने के दौरान। उसको पीटते हुए बाहर भी ले गए और अंदर भी लेकर गए। इसके बाद डॉक्टर्स के साथ भी छीनाझपटी करने वहां पहुंच गए। इस तरह की घटना होती हैं तो हमारा काम करना तो दुश्वार हो जाएगा। इसकी रिपोर्ट दर्ज करवा रहे हैं। मैं दूसरे पक्ष से थाने जाकर मिला हूं। उनका आरोप है। है कि स्टाफ नशे में था। मैंने अस्पताल आकर देखा तो स्टाफ ने कोई ड्रिंक नहीं की हुई थी, मरीज के परिजन साफ झूठ बोल रहे हैं। मैंने पुलिस को कहा है कि स्टाफ का भी मेडिकल करा लें।
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