केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। घाटोल उपखंड के भूंगड़ा क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसी हैं, जिनके नाम इस योजना के लाभार्थियों में चढ़ा दिए गए लेकिन न गैस चूल्हा दिया गया, न सिलेंडर। इनमें से अनेक महिलाओं के नाम से सिलेंडर भी लगातार उठाए जा रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि ये महिलाएं आज भी लकड़ियां जलाकर चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं। सूत्रों के अनुसार भूंगड़ा क्षेत्र में करीब 5 साल पहले बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं ने उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन के लिए आवेदन किए थे। इनमें से करीब 300 महिलाएं ऐसी बताई जा रही हैं, जिनके नाम से रिकॉर्ड में कनेक्शन ‘इशू’ बता दिए गए। लेकिन इन्हें न गैस कनेक्शन की डायरी दी गई और न ही गैस चूल्हा। यही नहीं, इनके नाम से लगातार सिलेंडर जारी करवाकर बेचे जा रहे हैं। इस बीच एजेंसी बिक गई, संचालक बदल गया लेकिन इन ‘लाभार्थियों’ को गैस चूल्हे और सिलेंडर नहीं मिले। इन महिलाओं ने बताया कि वे कई बार गैस एजेंसी पर गईं, गैस चूल्हा और सिलेंडर देने के लिए कहा लेकिन हर बार टाल दिया गया। उन्हें यही जवाब दिया जाता कि टंकी-चूल्हा अभी आए नहीं हैं, जब आएंगे तो दे देंगे। गैस कनेक्शन की मालकिन, लेकिन परंपरागत चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर बाएं 61 साल की कमला पत्नी शंकर और दाएं 58 साल की सुगना पत्नी लक्ष्मण। दोनों बांसवाड़ा जिले के घाटोल ब्लॉक की वादगुण ग्राम पंचायत के कानाडोकी का पाडा गांव की रहने वाली हैं। उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन की लाभार्थियों में इनके नाम हैं। यानी ये दोनों गैस कनेक्शन की मालकिन हैं। इनके नाम सिलेंडर भी लगातार उठ रहे हैं। इसके बावजूद ये लकड़ियां जलाकर चूल्हे पर खाना बनाने को विवश हैं क्योंकि कनेक्शन इन्हें सिर्फ कागजों में दिया गया है, हकीकत में नहीं। लाभार्थी ने कहा – मेरे नाम से सिलेंडर उठा, मुझे नहीं मिला
भूंगड़ा हाल बांसवाड़ा निवासी गफूरन बी ने बताया, वर्ष 2022 से मेरे नाम से सिलेंडर उठाए जा रहे हैं। मुझे पता चला कि 2022 में 9 अप्रैल को मेरे नाम से सिलेंडर उठा था। मैंने एजेंसी पर कई बार शिकायत भी की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। मुझे आज तक कोई सिलेंडर नहीं मिला। एजेंसी संचालक ने कहा- चूल्हा-सिलेंडर पहले के बाकी होंगे
“एजेंसी को साल 2019 से अगस्त 2023 तक पारस जैन चला रहे थे। शायद तब के बाकी होंगे। उन्होंने मुझे लिखित में दिया था कि उज्ज्वला में किसी को चूल्हा-सिलेंडर देना बाकी होगा तो जिम्मेदारी उनकी होगी।”
-जगदीश चरपोटा, संचालक, वीएस एचपी गैस ग्रामीण वितरक भूंगड़ा एक-दो बाकी रहे होंगे तो दे दूंगा : पूर्व संचालक
“मैंने ज्यादातर लाभार्थियों को तो चूल्हा और टंकी दे दी थी। एक-दो के कहीं बाकी रह गए होंगे तो दे दूंगा।” -पारस जैन, पूर्व संचालक डीएसओ ने कहा- ऐसा है तो यह मेरे लिए चौंकाने वाला है
“जिले में बहुत से लोग ऐसे हैं, जो खुद ही रिफिल नहीं करवाते। बहुत से कनेक्शन डेड हैं। लेकिन ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ है तो जांच करके कार्रवाई करेंगे।”
-ओमप्रकाश जोतड़, जिला रसद अधिकारी
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