अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में मशहूर गायक बी प्राक देर रात नतमस्तक हुए। इस दौरान उन्होंने श्रद्धा भाव से माथा टेककर सरबत दा भला (सभी का कल्याण) की अरदास की। जानकारी के अनुसार, बी प्राक रात करीब 11 बजे गुरुद्वारा साहिब पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सफेद कुर्ता-पजामा पहना हुआ था। वे लगभग एक घंटे तक परिक्रमा क्षेत्र में बैठे रहे और शांत भाव से गुरबाणी का श्रवण किया। इस आध्यात्मिक यात्रा की तस्वीरें उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर साझा की हैं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं। फैंस इसे उनकी सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव का सुंदर उदाहरण बता रहे हैं। सिंगर बी प्राक के बारे में जानिए… चंडीगढ़ में जन्मे, पिता संगीतकार रहे बी प्राक का जन्म 7 फरवरी 1986 को चंडीगढ़ के एक सिख परिवार में हुआ। उनके पिता स्व. वरिंदर बच्चन जाने-माने संगीतकार रहे हैं। बी प्राक ने बचपन में पिता से ही संगीत की बारीकियां सीखीं। बी प्राक कई बार इंटरव्यू में बता चुके हैं कि वह बचपन से सिंगर बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वे म्यूजिक डायरेक्टर बनें। म्यूजिक की बारीकियां सीखने के लिए बी प्राक ने 10 सालों तक पर्दे के पीछे रहकर संगीत सीखा। कोई नहीं जानता था, जानी के गीतों से मिली पहचान करियर की शुरुआत में बी प्राक ने प्रीक बी के नाम से काम शुरू किया, लेकिन शुरुआती गानों को कोई खास पहचान नहीं मिली। संघर्ष के दिनों में वे अपने पिता से 30 रुपए लेकर संगीत सीखने जाया करते थे। यहां तक कि उन्होंने संगीत की राह चुनने से पहले एक फैक्ट्री में भी काम किया था। 2017 में सांग राइटर जानी के गीत मन भरेया जिगरिया यारा कि तू मैंने छड्ड जाणा से प्राक ने सिंगिंग का डेब्यू किया। ये गीत सैड होने के बावजूद इतना हिट हुआ कि बी प्राक के लाखों फैंस बन गए। यह गाना इतना बड़ा हिट हुआ कि वे रातों-रात स्टार बन गए। अक्षय कुमार की फिल्म केसरी का गीत तेरी मिट्टी में मिल जावां हर किसी की जुबान पर चढ़ गया। 2012 में जानी से मुलाकात के बाद उनकी गायकी में निखार आता गया। इससे पहले बी प्राक ने 2013 में हार्डी संधू के गीत सोच का म्यूजिक बनाया थआ। इस गाने ने उनकी किस्मत बदलने में योगदान दिया।
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