चंडीगढ़ आईटी पार्क में प्लॉटेड डेवलपमेंट:मास्टर प्लान में बदलाव,सेक्टर-43 में मिक्स्ड यूज की मंजूरी, मनीमाजरा में 5 मंजिल निर्माण,700 फ्लैट्स का पुराना प्लान खत्म




चंडीगढ़ में पिछले एक दशक का सबसे बड़ा शहरी प्लानिंग बदलाव सामने आया है। प्रशासन ने शहर के मास्टर प्लान में बड़े संशोधनों को अंतिम रूप दे दिया है, जिससे जमीन के उपयोग, बिल्डिंग नियमों और विकास नियंत्रण में बड़े स्तर पर बदलाव होंगे। इन प्रस्तावों को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।
प्रशासन ने सेक्टर-43 सिटी सेंटर में मिक्स्ड लैंड यूज की अनुमति देने का फैसला किया है। इससे यहां रिहायशी, कमर्शियल और अन्य गतिविधियों को एक साथ विकसित किया जा सकेगा। 700 फ्लैट्स का पुराना प्लान खत्म
सबसे बड़ा बदलाव चंडीगढ़ आईटी पार्क में देखने को मिलेगा। यहां अब फ्लैट्स के साथ-साथ प्लॉटेड डेवलपमेंट की भी अनुमति दी जाएगी। पहले 700 फ्लैट्स बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन 2022 में पर्यावरण कारणों और प्रवासी पक्षियों के रास्ते (माइग्रेटरी बर्ड पाथ) की वजह से इसे मंजूरी नहीं मिली थी।
अब प्रशासन करीब 400 रिहायशी प्लॉट विकसित करने की योजना बना रहा है। मनीमाजरा में 5 मंजिल तक निर्माण
मनीमाजरा में नगर निगम की जमीन पर अब अधिकतम 5 मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ स्टिल्ट पार्किंग भी अनिवार्य होगी।
करीब 7.7 एकड़ क्षेत्र में यह प्रोजेक्ट विकसित किया जाएगा और इसमें एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) 2 तक रखने का प्रस्ताव है।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में भी बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनके तहत सभी प्लॉट्स के लिए एफएआर 2 करने की योजना है। इसके साथ ही ओपन स्पेस से जुड़े नियमों में भी ढील दी जाएगी, ताकि औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। लेबर हाउसिंग के लिए निर्धारित क्षेत्र को 2.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जिससे कामगारों के लिए सुविधाएं बेहतर हो सकें। हालांकि, इस क्षेत्र में अलग से रिहायशी यूनिट बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। व्यापार और शिक्षा संस्थानों को भी मिलेगी राहत
मास्टर प्लान में कमर्शियल प्रतिष्ठानों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी कई रियायतें दी जा रही हैं, ताकि विकास को बढ़ावा मिल सके। कमर्शियल क्षेत्रों में एफएआर और कवरेज एरिया बढ़ाने की तैयारी है, जिससे व्यापारी बड़े और आधुनिक भवन बना सकेंगे। मिक्स्ड लैंड यूज की सुविधा से एक ही जगह पर अलग-अलग गतिविधियां चलाना आसान होगा।वहीं, शैक्षणिक संस्थानों के लिए जमीन और मंजूरी से जुड़े नियम सरल किए जाएंगे, जिससे नए स्कूल और कॉलेज खोलना आसान होगा। इन बदलावों से व्यापार, शिक्षा और रोजगार के मौके बढ़ने की उम्मीद है। 10 साल बाद मास्टर प्लान में बदलाव
चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 अप्रैल 2015 में लागू हुआ था और करीब 10 साल से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था। उसी प्लान के आधार पर शहर का विकास चलता रहा। शहर को पहले करीब 5 लाख लोगों के हिसाब से डिजाइन किया गया था, लेकिन अब यहां 12 लाख से ज्यादा लोग रह रहे हैं। इससे ट्रैफिक, घरों और सुविधाओं पर काफी दबाव बढ़ गया है। जमीन भी कम बची है और जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। इसी वजह से प्रशासन अब मास्टर प्लान में बदलाव कर रहा है, ताकि जमीन का सही इस्तेमाल हो सके और शहर की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके। ‘डिरेगुलेशन 2.0’ के तहत लिया गया फैसला
यह फैसला केंद्र सरकार के ‘डिरेगुलेशन 2.0’ अभियान के तहत लिया गया है। इसका मकसद पुराने और जटिल नियमों को आसान बनाना है, ताकि लोगों और कारोबारियों को काम करने में कम दिक्कत आए। इस योजना के तहत बिल्डिंग, जमीन के उपयोग और मंजूरी से जुड़े नियमों में ढील दी जा रही है, जिससे प्रोजेक्ट्स जल्दी शुरू हो सकें। इससे व्यापार करना आसान होगा और नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, शहर में सीमित जमीन का बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकेगा। इससे रिहायशी, कमर्शियल और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। पहले जनता से मांगे जाएंगे सुझाव
प्रशासन के अनुसार, मास्टर प्लान में किए गए इन बदलावों का ड्राफ्ट सबसे पहले आम लोगों के सामने रखा जाएगा। इसके बाद शहर के निवासी, व्यापारी, उद्योगपति और अन्य स्टेकहोल्डर्स अपने सुझाव और आपत्तियां दे सकेंगे, ताकि फैसले में सभी की राय शामिल हो सके। सुझाव मिलने के बाद इस प्रस्ताव की जांच विशेषज्ञों की एक समिति करेगी। सभी पहलुओं को देखने के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र के गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इन बदलावों से लंबे समय से रुके हुए कई प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू किया जा सकेगा। साथ ही शहर में उद्योग, शिक्षा और रिहायशी क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।।



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