चंडीगढ़ में रायपुर कलां रेलवे फाटक पर बनने वाला अंडरपास एक बार फिर देरी की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। प्रशासन द्वारा तय हिस्से की पूरी राशि जमा न करने के कारण रेलवे ने टेंडर की फाइनल प्रक्रिया रोक दी है, जिससे निर्माण कार्य शुरू होने में बाधा आ रही है। अंडरपास की कुल लागत करीब 12.80 करोड़ रुपए तय की गई है। इसमें से चंडीगढ़ प्रशासन को 6.40 करोड़ रुपए रेलवे को देने हैं, लेकिन अब तक केवल 2 करोड़ रुपए ही ट्रांसफर किए गए हैं। इसी वजह से रेलवे ने साफ कर दिया है कि जब तक 50 प्रतिशत राशि जमा नहीं होती, तब तक फाइनेंशियल बिड नहीं खोली जाएगी और न ही वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा। रेलवे ने 6 अप्रैल को प्रशासन को पत्र लिखकर यह स्थिति स्पष्ट कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद फंड ट्रांसफर में देरी बनी हुई है। भूमि अधिग्रहण भी बना बड़ी बाधा अंडरपास निर्माण में सिर्फ फंड ही नहीं, बल्कि भूमि अधिग्रहण भी बड़ी समस्या बना हुआ है। प्रशासन को अप्रैल 2025 तक जमीन अधिग्रहण कर रेलवे को सौंपना था, लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। अधिकारियों का कहना है कि जमीन के रेट संशोधन के लिए फाइल उच्च अधिकारियों के पास भेजी गई है। रेलवे फाटक पर रोज लग रहा जाम रायपुर कलां रेलवे फाटक पर रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अंडरपास बनने से इस समस्या का समाधान होना था, लेकिन देरी के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ज्वाइंट कमेटी ने उठाए सवाल ज्वाइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष प्रताप सिंह राणा ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने चंडीगढ़ के प्रशासक और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अपील की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। 12 साल से अटका प्रोजेक्ट, जिम्मेदार कौन? रेलवे ने इस अंडरपास का प्रस्ताव वर्ष 2014 में भेजा था, लेकिन 12 साल बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो पाई है। वर्ष 2023 में भी प्रशासनिक लापरवाही के कारण टेंडर रद्द हो गया था, जिससे समय और संसाधनों का नुकसान हुआ। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस देरी के लिए जिम्मेदार कौन है और कब तक लोगों को इस समस्या से राहत मिलेगी।
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