चूरू के केंद्रीय विद्यालय में सोमवार को एक सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा के निर्देशन में हुई इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य हवाई हमले जैसी आपातकालीन स्थितियों में विभिन्न सरकारी विभागों के रिस्पॉन्स टाइम का परीक्षण करना था। पुलिस कंट्रोल रूम से हवाई हमले की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा, एसपी निश्चय प्रसाद एम, एडीएम अर्पिता सोनी और एसडीएम सुनील कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। उनके साथ एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस बल और नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवक भी घटनास्थल पर पहुंचे। रेस्क्यू टीमों ने दिखाई तैयारी
मॉक ड्रिल के दौरान शाम पौने 7 बजे पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा हवाई हमले में हताहतों की सूचना प्रसारित की गई। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने मोर्चा संभाला। नागरिक सुरक्षा और मेडिकल टीम ने मलबे में दबे और घायल लोगों को बाहर निकालने में तत्परता दिखाई। एडीएम अर्पिता सोनी ने बताया कि ड्रिल में प्रतीकात्मक रूप से पांच व्यक्तियों की मृत्यु और 14 के गंभीर रूप से घायल होने का परिदृश्य रखा गया था। गंभीर घायलों को तत्काल एम्बुलेंस के जरिए गर्वमेंट डीबी अस्पताल पहुंचाया गया। इस दौरान घायलों की गंभीरता के आधार पर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उपचार देने का अभ्यास किया गया। सायरन गूंजने के बाद ब्लैकआउट किया
शाम को सायरन की गूंज के साथ ही शहर में ब्लैकआउट का अभ्यास भी किया गया। शाम सवा सात बजे बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, ताकि युद्ध जैसी स्थितियों में जन-सहभागिता और आवश्यक सेवाओं के संचालन की क्षमता को परखा जा सके। समीक्षा के दौरान सामने आया कि जिला कलेक्टर और एसपी सबसे पहले मौके पर पहुंचे। वहीं, सिविल डिफेंस की टीम 6 बजकर 54 मिनट पर और विद्युत विभाग की टीम 6 बजकर 58 मिनट पर सबसे अंत में पहुंची। जिला कलेक्टर सुराणा ने रिस्पॉन्स टाइम की समीक्षा करते हुए देरी से पहुंचने वाले विभागों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के निर्देश दिए।
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