लुधियाना जिले में जगराओं की पुरानी अनाज मंडी के व्यापारियों ने वीरवार को कूड़े के ढेर के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई महीनों से जमा हो रहा कूड़ा अब एक पक्के डंप और पहाड़ का रूप ले चुका है, जिससे परेशान होकर कारोबारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। यह कूड़ा गौशाला के पास बनाया जा रहा है। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि जब राहगीरों का गुजरना मुश्किल है, तो यहां रहने वाले लोगों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। मंडी में 100 से अधिक दुकानें हैं और अधिकांश दुकानों के ऊपर परिवार भी रहते हैं। जिन दुकानों के पास कूड़े का यह विशाल ढेर लगा है, वहां दुकानदारों और परिवारों का सांस लेना और खाना तक दूभर हो गया है। बदबू, मच्छरों और गंदगी के कारण हालात बेहद खराब हो चुके हैं। कारोबारियों ने कहा कि यह मंडी हर महीने करोड़ों रुपए का कारोबार कर सरकार को मोटा टैक्स देती है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कूड़े की समस्या से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हलके की विधायक सर्वजीत कौर माणुके ने हाल ही में इसी कूड़े के ढेर के पास एक मोहल्ला क्लीनिक का उद्घाटन किया है, जहां पहले सर्विस सेंटर हुआ करता था। मंडी से कूड़े के ढेर को हटाने की मांग व्यापारियों के अनुसार, जरूरत कूड़े के पहाड़ को हटाने की थी, लेकिन प्रशासन ने उसके पास ही क्लीनिक खोल दिया, ताकि कूड़े और गंदगी से बीमार होने वाले लोगों को दवा लेने के लिए दूर न जाना पड़े। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि बढ़ती गर्मी और आने वाली बरसात में इस गंदगी से कोई खतरनाक बीमारी भी फैल सकती है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो हर महीने होने वाले करोड़ों रुपए के कारोबार पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि इतनी गंदगी के बीच कौन खरीद-फरोख्त करने आएगा। व्यापारियों ने पंजाब सरकार से मांग की कि शहर के कारोबार और टैक्स को बचाने के लिए तुरंत मंडी के अंदर से कूड़े के ढेर को हटाया जाए। साथ ही कूड़े की सफाई के नाम पर खर्च किए जा रहे लाखों रुपये की जांच भी करवाई जाए, क्योंकि जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा। कूड़े के नाम पर 20 लाख का खेल व्यापारियों ने आरोप लगाया कि नगर कौंसिल द्वारा शहर को कूड़ा मुक्त करने के नाम पर करीब 20 लाख रुपए का प्रस्ताव पास किया गया था। लेकिन धरातल पर हालात जस के तस हैं। उनका कहना है कि कौंसिल प्रधान ने अपनी पावर का इस्तेमाल करते हुए यह प्रस्ताव डाला, लेकिन कूड़ा उठवाने की जगह कई जगहों पर उसे आग के हवाले कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पुरानी दाना मंडी में भी कूड़े के पहाड़ खड़े हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि सफाई के नाम पर खर्च हो रहा पैसा आखिर कहां जा रहा है।
व्यापारियों ने कहा कि नगर परिषद के पास करोड़ों रुपए का फंड मौजूद है। ऐसे में शहर से बाहर उचित जमीन खरीदकर वहां कूड़ा डंप किया जाना चाहिए, ताकि शहर के बीच बने इन कूड़े के पहाड़ों से लोगों को राहत मिल सके। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो व्यापारी बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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