जनगणना में ड्यूटी पर शुरू हुई बहानेबाजी:किसी के पैर में डले नट-बोल्ट तो किसी को धूप से हो रही एलर्जी




शहर में जनगणना की कवायद क्या शुरू हुई, सरकारी दफ्तरों में बीमारियों का अंबार लग गया है। कल तक जो साहब और मास्साब दफ्तरों में पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे थे, ड्यूटी का आदेश हाथ में आते ही अचानक उनकी नजर कमजोर हो गई है और दिल की धड़कनें तेज होने लगी हैं। नगर निगम की ओर से शहर में जनगणना के लिए विभिन्न विभागों के 600 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन इनमें से करीब 100 से ज्यादा कर्मचारियों ने ड्यूटी कटवाने के लिए नगर निगम में अर्जी लगा दी है। हालात ये हैं कि अधिकारी अब काम संभालें या इन अजीबो-गरीब बहानों की फाइलें। नगर निगम में जमा हुई आवेदनों की फाइलों को पलटें तो बहानों का ऐसा पिटारा खुलता है कि आप भी दंग रह जाएंगे। एक कर्मचारी ने दलील दी है कि उनके पैर में स्क्रू डला है, हालांकि जांच में पता चला कि यह ऑपरेशन छह महीने पुराना है और साहब तब से आराम से चल-फिर रहे थे। एक मैडम का कहना है कि उन्हें तेज धूप से स्किन एलर्जी होती है, इसलिए वे जनगणना के फील्ड वर्क में नहीं जा सकतीं। वहीं, एक कर्मचारी ने तो अपनी नजर इतनी कमजोर बता दी कि उन्हें अब जनगणना के फॉर्म के खाने भी नजर नहीं आ रहे। ड्यूटी कटवाने की इस रेस में शिक्षा विभाग के शिक्षक और मैडम सबसे आगे हैं। सिर्फ बीमारी ही नहीं, बल्कि पारिवारिक मजबूरियों का भी भरपूर सहारा लिया जा रहा है। किसी का बच्चा छोटा है तो किसी के ससुर बीमार हैं। सीएम-मंत्री, सांसद- विधायक और आईएएस- आईपीएस तक से लगाई जुगाड़ दिलचस्प बात यह है कि सिफारिशों का दौर केवल नगर निगम के दफ्तर तक सीमित नहीं है। अपनी ड्यूटी कटवाने के लिए कर्मचारी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर मंत्री, सांसद, विधायक और बड़े आईएएस- आईपीएस अफसरों तक से फोन करवा रहे हैं। निगम अधिकारियों ने बताया ऐसी स्थिति में उनके सामने असमंजस का आलम है। जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर लगी इस ड्यूटी को लेकर मचे घमासान के बीच अधीक्षण अभियंता राहुल कुमार का कहना है कि आवेदनों की भारी संख्या को देखते हुए अब हर मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। जो वास्तव में अक्षम हैं, उन्हें राहत मिल सकती है, लेकिन फर्जी बहानेबाजों पर सख्ती होना तय है।विभाग अब मेडिकल बोर्ड के जरिए इन दावों की पुष्टि कराएगा। यदि बीमारी या शारीरिक समस्या झूठी पाई गई, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम’ के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी।



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