जयपुर में बिजली के बॉक्स और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट बनाने की फैक्ट्री में आग लग गई। हादसे में फैक्ट्री में काम कर रही महिला मजदूर की जिंदा जल गई। वहीं दो अन्य झुलस गए। सूचना मिलते ही दमकल और पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। फैक्ट्री में फायर सेफ्टी उपकरण भी नहीं थे। हादसा महेश नगर थाना क्षेत्र के 22 गोदाम सुदर्शनपुरा इलाके में बुधवार शाम 6:30 बजे हुआ। बिजली इक्विपमेंट बनाने की फैक्ट्री जेएमडी एंटरप्राइजेज के बेसमेंट में भीषण आग लग गई थी। इस दौरान बेसमेंट में रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ब्लास्ट भी हुआ, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। घटना के समय फैक्ट्री में 7 मजदूर काम कर रहे थे। हादसे की तस्वीरें घायलों को एसएमएस अस्पताल में कराया भर्ती महेश नगर पुलिस थाने के SHO सुरेश यादव ने बताया- हादसे में गोमा देवी (47) निवासी यूपी की जलने से मौत हो गई। दो मजदूर अभिषेक (30) निवासी बिहार हाल निवासी नंदपुरी 22 गोदाम, मनोज मालाकर (42) निवासी बिहार हाल निवासी नंदपुरी गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों को एसएमएस हॉस्पिटल की बर्न यूनिट में भर्ती करवाया गया है। यूनिट मालिक शशांक कटियार है। लोहे की चद्दर काटने के दौरान हुआ हादसा, पांच सिलेंडर रखे थे फैक्ट्री में जहां हादसा हुआ, वहां बिजली के उपकरण जैसे फैन बॉक्स, कंशिल्ड बॉक्स बनाए जाते थे। इसके लिए बेसमेंट में भट्टी जलाकर लोहे की चद्दर को काटकर कंशिल्ड और फैन बॉक्स का रूप दिया जा रहा था। भट्टी के साथ गैस सिलेंडर का उपयोग भी किया जा रहा था। 22 गोदाम फायर स्टेशन के अनुसार- बेसमेंट में रखे पाउडर पोटिंग की भट्टी में लगे सिलेंडर में विस्फोट होने के कारण आग लगी। वहीं बताया जा रहा है कि जब विस्फोट हुआ, उस दौरान कम्प्रेशर चालू था, जिससे आग भभक पड़ी। फैक्ट्री में 69 किलो एलपीजी गैस से भरे पांच सिलेंडर रखे थे। फायर फाइटर्स सबसे पहले सिलेंडरों को आग की लपटों से दूर लेकर गए। अगर पांचों सिलेंडर आग की चपेट में आते तो आसपास के बड़े हिस्से को चपेट में ले सकते थे। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया। फायर फाइटर्स प्रवीण, जितेंद्र, कुलदीप आदि ने रेस्क्यू किया। फैक्ट्री में फायर एनओसी नहीं फैक्ट्री बिना फायर एनओसी के संचालित हो रही है। करीब 500 वर्गगज में फैली फैक्ट्री में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं है। फैक्ट्री में आग से बचने के उपकरण ही नहीं, फायर एनओसी तक नहीं है। फैक्ट्री में बिना वेंटिलेशन के मजदूरों से काम करवाया जा रहा था। फैक्ट्री में घटना के समय सात मजदूर मौजूद थे, जिनमें तीन को खिड़की तोड़कर बाहर निकाला गया।
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