जालौन में बिना मान्यता के संचालित मिले 21 अवैध स्कूल:डीएम की जांच में हुआ खुलासा, सभी पर लगेगा ताला




जालौन जिले में बिना मान्यता के संचालित हो रहे विद्यालयों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने व्यापक निरीक्षण के दौरान 21 ऐसे विद्यालय चिन्हित किए हैं, जो बिना मान्यता या नवीनीकरण के संचालित हो रहे थे। इन सभी विद्यालयों को तत्काल प्रभाव से बंद कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में जालौन तहसील के सिरसा कलार स्थित शाइनिंग स्टार पब्लिक स्कूल, पीस चंदेल स्कूल और आरजीपी अकैडमी बिना मान्यता के संचालित पाए गए। इन संस्थानों को पहले भी नोटिस जारी कर बंद करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद संचालन जारी रहा। इसी तरह कुठौंद कस्बे के विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल, नैनपुर स्थित एबीपी पब्लिक एकेडमी और बी.आर. अंबेडकर कॉन्वेंट स्कूल को 1 अप्रैल 2026 को नोटिस दिए जाने के बावजूद बंद नहीं किया गया। माधौगढ़ तहसील के उमरी गांव में श्री केहर सिंह शिक्षा समिति सुशीला देवी विद्यालय, मान सिंह वाहिनी विद्यालय लिडऊपुर, सूरजपाल शिक्षा निकेतन, रामपुरा का डॉ. बी.आर. अंबेडकर विद्या मंदिर जूनियर हाई स्कूल भीकमपुर, एसएनएस वर्ल्ड स्कूल और न्यू गैलेक्सी कॉन्वेंट स्कूल बंगरा भी बिना मान्यता के चलते मिले। कालपी तहसील के जे.के. चंदेल पब्लिक स्कूल महेवा, विजडम एकेडमी पब्लिक स्कूल आटा और इंडियन पब्लिक स्कूल आटा, जबकि उरई तहसील में एंजिल विंग्स एकेडमी, सेठ भगवती प्रसाद शिशु मंदिर पब्लिक स्कूल (कक्षा 6 से 12), वेदवती पब्लिक स्कूल कोटरा, मधुबन एकेडमी बन्धौली, चंद्रशेखर शिक्षण संस्थान उरई और उमाशंकर पब्लिक स्कूल बंबी रोड उरई भी नियमों की अनदेखी करते हुए संचालित पाए गए। निरीक्षण के दौरान कुछ विद्यालयों ने जांच से बचने के लिए स्कूल बंद कर दिए। कोटरा स्थित वेदवती पब्लिक स्कूल में ताला लगा मिला, जबकि बाहर यूनिफॉर्म में बच्चे मौजूद थे। वहीं मधुबन एकेडमी के बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि यह सप्ताह में केवल 2-3 दिन ही खुलता है। मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह ने बताया कि सभी अवैध विद्यालयों को बंद कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी छात्र-छात्रा परिसर में मौजूद न हो। साथ ही अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों का प्रवेश केवल मान्यता प्राप्त विद्यालयों में ही कराएं, ताकि उनके भविष्य से कोई समझौता न हो।



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