निम्बार्क कोट शताब्दी वर्ष समारोह संपन्न:अक्षय तृतीया पर सर्वांग अभिषेक हुआ, फूलबंगले में विराजे राधारमण लाल,एक वर्ष से चल रहा था शताब्दी वर्ष महोत्सव




वृंदावन के निम्बार्क कोट मंदिर में बीते एक वर्ष से चल रहा शताब्दी वर्ष समारोह अक्षय तृतीया पर धूमधाम से संपन्न हुआ। मंदिर में अनेक धार्मिक,सांस्कृतिक समारोहों की शुरूआत पिछले वर्ष अक्षय तृतीया से ही हुई थी। एक वर्ष के दौरान मंदिर में हर महीने भागवत सप्ताह, वैष्णव समाज गायन और विशेष दर्शन का आयोजन का आयोजन हुआ। इसके अलावा रासलीलाएं, विद्वत चर्चाएं हुई। शोभायात्रा भी निकाली गई। निंबार्क कोट का है विशेष स्थान समारोहों में वृंदावन के सभी संप्रदायों के प्रमुख मंदिरों के पीठाधीश्वर, संत, महंत, ब्रजवासियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। भक्तों ने मंदिर में मौजूद राम चरित मानस रचयिता गोस्वामी तुलसी दास जी के लोटे से चरणामृत भी प्राप्त किया। उत्सव की विशेषता यह रही कि ब्रज के अनेक सिद्ध संतों व कथावाचकों ने अपनी ओर से उत्सव के लिए वित्तजा सेवा की और कहा, उनके मन में निम्बार्क कोट का विशेष स्थान है। सौ साल में पहली बार हुए सर्वांग दर्शन समापन समारोह के अवसर सोमवार को मंदिर के गर्भगृह के बाहर खुले जगमोहन में विशाल फूल बंगला सजाया गया, जिसमें विराजमान श्रीराधारमण लाल जी और निम्बार्क आचार्य पंचायन के दर्शन कर श्रद्धालु अभिभूत हो गए। बीती एक सदी में पहली बार खुले पर्दे में ठाकुर श्रीराधारमण लालजी के सर्वांग अभिषेक दर्शन हुए। यहां श्रीविग्रह का दैनिक स्नान बंद पर्दे में ही होता था और केवल मुख व हाथों में चंदन लिपटे दर्शन होते थे। शताब्दी वर्ष की आखिरी भागवत सप्ताह भी संपन्न हुई जिसमें हर दिन वृंदावन के एक विशिष्ट संत, कथावाचकों ने दैनिक कथा से पूर्व अपनी भावनाएं व्यक्त की। गोरेलाल कुंज के महंत ने सुनाए पद मंदिर सेवायत वृंदावन बिहारी ने बताया कि उनके परबाबा भगवत नारायण ने निम्बार्क कोट में श्री राधारमण लालजी और निम्बार्क आचार्य पंचायतन विग्रह की प्रतिष्ठापना सन् 1926 में अक्षय तृतीया के दिन की थी, मंदिर निर्माण 1924 से शुरू हुआ था। शताब्दी वर्ष के दौरान दौरान मंदिर में हर महीने में एक बार भागवत सप्ताह का आयोजन हुआ और वर्षभर के दौरान 100 पंडितों ने भागवत का मूलपाठ किया। अखंड संकीर्तन व समाज गायन के कार्यक्रम हुए। समारोह की आखिरी कथा अंशुमान गोपालजी ने की। गोरेलाल कुंज के महंत किशोर दास जी ने ठाकुरजी के सामने दो पद गाकर अपने उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि निम्बार्क कोट की स्थापना तो 100 वर्ष पूर्व हुई है लेकिन यहां होने वाला निम्बार्काचार्य जयंती उत्सव 183 वर्ष पुराना है जिसे गोरेलाल कुंज और रसिक बिहारी मंदिर से सटे उत्सव कुंज में ब्रज में भक्तमाल कथा के पुरोधा बाबा गोपालदासजी ने शुरू किया था। उन्होंने कहा कि वे बचपन से निम्बार्क कोट आ रहे हैं। मलूक पीठाधीश्वर बाबा राजेंद्रदास महाराज की ओर से संदेश पहुंचाते हुए किशोर दास ने कहा कि उन्होंने निम्बार्क कोट की झरा पंगत का कई बार आनंद लिया है जहां उन्हें छह संप्रदायों के भजनानंदी संतों के दर्शन सहज ही मिल जाते थे। उन्होंने यहां मौजूद तुलसीदास जी के लोटे और उसमें उपलब्ध संतों के चरणामृत की विशेष महिमा भी सुनाई। सुदामा कुटी के श्री महंत नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्षण दास महाराज ने कहा कि सुदामा कुटी व निम्बार्क कोट का बहुत पुराना नाता है, वृंदावन में दोनों की स्थापना एक साथ ही हुई थी। 83 साल पहले संवत् 2000 में प्रकाशित निम्बार्काचार्य श्रीजी महाराज के लिखे एक लेख का परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि निम्बार्क कोट से निकलने वाली सवारी का विश्राम स्थल वंशीवट पर सुदामा कुटी में होता है। विद्वानों ने किए अनुभव साझा टटिया स्थान के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए मुखिया किशोरी शरण भक्तमाली, गौड़िय संप्रदाय के कथाकार अच्युतलाल भट्‌ट, भागवत कथाकार हरेकृष्ण शास्त्री शरद, राधा बल्लभ संप्रदाय के बाबा गौरांगी शरण, विष्णु मोहन नागार्च, बालशुक कथाकार पुंडरीकाक्ष, महामंडलेश्वर नवल गिरी, ब्राह्मण महासभा संस्थापक सुरेश चंद शर्मा, राष्ट्रीय ब्राह्मण सेवा संघ के महानगर अध्यक्ष गोविंद शर्मा सहित अनेक संत-महंतों, ब्रजवासी पंडा समाज के प्रतिनिधियों, पुरोहितों ने निम्बार्क कोट से जुड़े कई पीढ़ियों के अनुभव साझा किए।



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