नोएडा हिंसा में बिहार के 2 लोग गिरफ्तार:जमशेदपुर NIT का छात्र मास्टरमाइंड, पाकिस्तान से ऑपरेट हो रही थी पूरी एक्टिविटी




नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने 3 मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान की है। इनमें रूपेश राय और मनीषा चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आदित्य आनंद अभी फरार है। रूपेश राय और मनीषा चौहान बिहार के रहने वाले हैं। तीनों आरोपी हिंसा के दौरान नोएडा में मौजूद थे और श्रमिकों को भड़काने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। तीन संगठनों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ प्रमुख रूप से शामिल है। इस संगठन का प्रमुख रूपेश राय है। यह संगठन श्रमिकों को संगठित कर हिंसक प्रदर्शन के लिए उकसा रहा था। वहीं, जांच के दौरान पुलिस को दो संदिग्ध ट्विटर (X) हैंडल की जानकारी मिली है। सूत्रों के मुताबिक, ये हैंडल पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे थे और पिछले 3 महीने से एक्टिव थे। इन हैंडल्स को संचालित करने में वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने इनका बैक डेटा भी मंगवाया है। ये बातें गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने नोएडा में हिंसक प्रदर्शन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताईं। हिंसक प्रदर्शन की तस्वीरें देखिए…

वॉट्सएप ग्रुप के जरिए हिंसा भड़काई गई
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने 9 और 10 अप्रैल को वॉट्सएप ग्रुप बनाकर श्रमिकों को जोड़ा। इन ग्रुप्स के जरिए सड़कों पर उतरने, आगजनी और तोड़-फोड़ करने के लिए उकसाया गया। डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में लोगों को भड़काने की साजिश रची गई। इसके बाद 13 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे 42 हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में फैक्ट्रियों में पथराव, तोड़फोड़ की। कई गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और 50 से ज्यादा गाड़ियां फूंक दीं। 2 दिन तक हिंसा चलती रही। कमिश्नर बोलीं- पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे संदिग्ध X (ट्विटर) हैंडल
गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया- जांच के दौरान पुलिस को दो संदिग्ध X हैंडल ‘Meer Ilayasi’ और ‘Ayushi Tiwari’ के बारे में पता चला। प्लेटफॉर्म से मिले डेटा के अनुसार, ये हैंडल पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे थे और पिछले 3 महीनों से सक्रिय थे। सूत्रों के मुताबिक, इन हैंडल्स को चलाने में VPN का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने इनका बैक डेटा भी मंगवाया है। क्यूआर कोड से जोड़े गए मजदूर
ये तीनों आरोपी 31 मार्च और एक अप्रैल को ही नोएडा पहुंच गए थे। इसके बाद नौ और 10 अप्रैल को जगह-जगह क्यूआर कोड स्कैन करवाकर कई वाट्सएप ग्रुप बनाए गए और मजदूरों को इसमें जोड़ा गया। इन्हीं ग्रुप के जरिए भीड़ को उकसाया गया। इससे पहले भी इन आरोपियों की मौजूदगी दिल्ली के सीएए-एनआरसी प्रदर्शनों में पाई गई है। नोएडा के पुलिस कमिश्नर आईपीएस लक्ष्मी सिंह ने बताया कि हिंसा के दौरान अनुषी तिवारी और मीर इलियास नाम के दो एक्स (ट्विटर) हैंडल से फर्जी जानकारी और मौत की झूठी खबरें लगातार फैलाई जा रही थी। साइबर जांच में खुलासा हुआ कि ये दोनों एकाउंट पाकिस्तान से चलाए जा रहे थे। इनका मुख्य मकसद भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में अशांति और दंगा फैलाना था। फिलहाल पुलिस फरार आदित्य आनंद की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। कर्मचारियों क्यों सड़क पर उतरे थे कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें न्यूनतम वेतन पर काम करना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में पालन पोषण मुश्किल हो रहा है। हर महीने 10 से 12 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। 12 घंटे काम कराया जा रहा है। ओवर टाइम दिया ही नहीं जाता और शोषण जो होता है वह अलग। रविवार को इसे लेकर समझौता हुआ था। इसके बावजूद कुछ श्रमिक संतुष्ट नहीं हुए या योजनाबद्ध तरीके से सड़क पर उतर आए Ls। बवाल के बाद सरकार ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाई हंगामे और विरोध के बाद यूपी सरकार ने सोमवार देर रात फैक्ट्री कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का फैसला लिया। न्यूनतम मजदूरी दरों में करीब 3000 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। सोमवार को हुए बवाल के बाद हाईलेवल कमेटी ने रात में कर्मचारियों के साथ बैठक की थी। सरकार ने आदेश जारी कर कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी दे दी। ————————– ये खबर भी पढ़िए- महिला बोली- मेरे सामने पति-देवर कट गए, प्रयागराज में ट्रेन की चपेट में आए; रेलवे में अप्रेंटिसशिप ज्वाइन कर लौट रहे युवक की भी जान गई मैं, मेरे पति और देवर कालका एक्सप्रेस से कोलकाता जा रहे थे। हमें रिश्तेदारी की एक शादी में शामिल होना था। रास्ते में किसी के ट्रेन से गिर जाने की वजह से ट्रेन को रोक दिया गया। ट्रेन रुकने पर मेरे पति और देवर नीचे उतरकर देखने चले गए। पढ़ें पूरी खबर…



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