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जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बयान दिया है। इन्होंने कहा है कि हम विधानसभा चुनाव में आंतरिक और बाहरी दोनों कारण से पिछड़ गए। समय पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं होने और बूथ लेवल तक हमारा सांगठनिक ढांचा नहीं रहने के कारण जन सुराज को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन आने वाले पंचायत चुनाव से पहले जन सुराज नए सिरे से अपने संगठन को गांव और बूथ लेवल पर खड़ा कर रही है। आज बेगूसराय में संगठन घोषणा करने के दौरान उन्होंने यह बातें कही है। मनोज भारती ने कहा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान हम लोग जल्दबाजी में थे। चुनाव से पहले संगठन बनाना था। इसलिए जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर संगठन बनाया गया। लेकिन गांव और बूथ तक लेवल तक संगठन नहीं बना सके। जिसके कारण चुनाव के दौरान बहुत सारी कठिनाइयां हुई। चुनाव के नतीजे जो आए, उसके बाद पिछले दो-तीन महीने में उसको गंभीरता पूर्वक आत्म विश्लेषण किया। इसमें जो सामने आया, उसे दो भागों में बांटा गया है, एक बाहरी कारण और एक आंतरिक कारण था। बाहरी कारण में सबसे प्रमुख था कि सरकार ने चुनाव के अंतिम समय तक लोगों के खाते में 10-10 हजार रुपये डायरेक्ट ट्रांसफर किया। यह आचार संहिता के खिलाफ था। विपक्ष को जबरदस्त विरोध करना चाहिए था लेकिन चुनाव आयोग ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। यह एक ऐसी चीज से जिसका विरोध होना चाहिए था। इसका विरोध नहीं होगा तो सत्तारूढ़ दल आगे आने वाले चुनाव में और भी खतरनाक काम करेगा। विपक्ष को जबरदस्त विरोध करना चाहिए था। जन सुराज ने विरोध किया और हमने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 15 दिन पहले हमने हाई कोर्ट में रिट दायर किया है। दूसरा कारण था कि चुनाव से ठीक 2 दिन पहले हवा उड़ा दिया गया कि किसी और को वोट दिया तो जंगलराज वापस आ जाएगा। जिसके कारण हमारे बहुत सारे साथियों ने हमारा साथ छोड़ दिया। चुनाव होने तक प्रशांत किशोर की हर सभा मेंअप्रत्याशित भीड़ जुटती थी। लेकिन सिर्फ भीड़ साबित हुई, विश्वास नहीं हो पाया कि जन सुराज अपनी सरकार बन सकती है। पहले हमारे पास समय नहीं था अब हमारे पास पर्याप्त समय भी है और नजर भी है कि हम जन सुराज को वापस कैसे खड़ा कर सकते हैं। इस बार जो खड़ा करेंगे, उसे जमीन से खड़ा करेंगे। चुनाव में पिछड़ने का आंतरिक कारण कई था। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण था कि हमने अपने उम्मीदवारों की घोषणा बहुत देर से किया। अगर दो महीने पहले उम्मीदवारों की घोषणा कर देते तो विधानसभा चुनाव में नतीजा कुछ और होता। बिहार में 44 संगठन जिला बनाया पहले हमने प्रदेश से नीचे जिला, अनुमंडल और प्रखंड रखा अब हमने अनुमंडल का स्तर हटा दिया और गांव और बूथ लेवल पर अपने संगठन को मजबूत कर रहे हैं। बिहार में 44 संगठन जिला बनाया गया है। इन जिलों को 12 क्षेत्र में बांटा गया है। हमारे पास सिर्फ तीन प्रकोष्ठ महिला, युवा और किसान थे। चुनाव के दौरान लगा कि अलग-अलग वर्ग के लिए अलग-अलग प्रकोष्ठ होना चाहिए। लगा कि ऐसे नेता नहीं हैं, जिन्हें लोग आईडेंटिफाई कर सके। वर्गीय नेताओं की कमी महसूस हुई, इसको देखते हुए अब हमने नए संगठन में छह और प्रकोष्ठ बनाया है। महिला, युवा, किसान के बाद अब पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक, बुद्धिजीवी और व्यवसाय प्रकोष्ठ भी बनाए गए हैं। आगे जरूरत के मुताबिक और प्रकोष्ठ बनाए जाएंगे। पहले हमने अपना संगठन विधानसभा चुनाव को देखकर बनाया था। बूथ लेवल पर अपना संगठन खड़ा कर रहे लेकिन अब जो मेहनत कर रहे हैं इसका मुख्य कारण है कि हमारी नजर पंचायत चुनाव पर है। हम वार्ड और बूथ लेवल पर अपना संगठन खड़ा कर रहे हैं और संगठन की पूरी प्रक्रिया अक्टूबर तक खड़ी हो जाएगी। प्रत्येक बूथ से 15 सच्चे और अच्छे जन सुराजी को निकालना है। ऐसे में हम पूरे बिहार में एक बड़ा संगठन खड़ा कर देंगे जो नवंबर में संभावित पंचायत चुनाव में बड़ा निर्णायक साबित हो सकता है। विधानसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर ने तीन-तीन बार सभी जिले में जाने की बात कही थी। एक बार जा चुके हैं, बेगूसराय में मई में और तीसरी बार जून में आएंगे। यहां वे जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक के सभी प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ रणनीति पर चर्चा करेंगे। अभी जो जिला कमेटी बनाई गई है, यह जिला कमेटी का बहुत बड़ा दायित्व था और संगठन को वार्ड स्तर तक पहुंचना है। डॉ. सोनू शंकर और महामंत्री मजहर आलम जिलाध्यक्ष जिलाध्यक्ष डॉ. सोनू शंकर और महामंत्री मजहर आलम बनाया गया है। युवा जिलाध्यक्ष अगम कुमार, महिला जिलाध्यक्ष किरण कुमारी, किसान जिलाध्यक्ष हीरालाल महतो, अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष अंजारुल हक को बनाया गया है।
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