‘कोर्ट के फैसले का हम सम्मान करते हैं, जज साहब ने जो फैसला दिया है, वह सबूत के आधार पर ही दिया होगा। ड्यूटी के दौरान मेरे पिता की हत्या की गई थी। लेकिन मेरे पापा की हत्या मामले की जांच के दौरान इसे सड़क हादसे का रूप दे दिया गया। मेरी मां पहले से बीमार थी, पिता की हत्या के बाद और बीमार रहने लगी। ठीक से बोल भी नहीं पाती।’ मधुबनी के रहिका प्रखंड के मारर गांव के रहने वाले 15 साल के गौरव कुमार ने ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। दरअसल, गौरव के पिता SI खामस चौधरी 19 दिसंबर 2023 को बेगूसराय के नावकोठी थाने में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। शराब तस्करों ने ऑल्टो कार से 100 किलोमीटर की रफ्तार से बूढ़ी गंडक नदी के छतौना पुल पर खामस चौधरी को रौंद दिया था। बेगूसराय जिला कोर्ट ने दरोगा की गाड़ी से कुचलकर हत्या करने वाले 3 दोषियों को 5 साल की सजा सुनाई है। 9 लोगों की गवाही के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (नवम) गौरव आनंद की अदालत ने बुधवार को ये फैसला सुनाया है। खासम चौधरी के बेटे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में क्या-क्या कहा, खामस चौधरी के परिवार में कौन-कौन है, वारदात के बाद सरकार ने मृतक SI के परिवार से क्या वादा किया था, कौन-कौन से वादे पूरे किए गए? पढ़िए, पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले SI खामस चौधरी और उनके परिवार की तस्वीरें देखिए अब जानिए खामस चौधरी के बेटे गौरव ने कोर्ट के फैसले के बाद क्या कहा गौरव ने बताया कि मां कल्पना देवी अक्सर बीमार रहती थी, जिसके कारण पापा ने अपना ट्रांसफर बेगूसराय कराया। क्योंकि वहीं एक अस्पताल में मेरी मां का इलाज चल रहा था। मैं चार भाई बहनों में सबसे बड़ा हूं। इसी साल मैंने मैट्रिक की परीक्षा दी थी और फर्स्ट डिविजन से पास किया था। मेरी बहन संध्या सुमन, साक्षी सुमन और रोशनी सुमन अभी छठी, सातवीं और नौवीं क्लास में पढ़ रही है। प्रशासन की ओर से घटना के बाद किस तरह की मदद का वादा किया गया था, क्या इन वादों को पूरा किया गया। इस सवाल पर गौरव ने कहा कि पिताजी की शहादत के बाद प्रशासन ने जिस मदद की बात कही थी, वो हम लोगों को मिल गया। इस बारे में ज्यादा डिटेल में नहीं बता सकता हूं। प्रशासन ने जो भी मदद की है, उससे हम लोगों को राहत मिली है। कुछ ऐसी मदद भी है, जो प्रक्रिया में है। गौरव ने कहा कि मां काफी बीमार है और सही तरीके से बात भी नहीं कर पाती है। दवा चल रहा है। मैं अपने ननिहाल में रहता हूं। कोर्ट के जजमेंट की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उचित सजा मिलना चाहिए था, पिताजी की हत्या हुई थी। आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। लेकिन वह नहीं हुआ, कोर्ट ने जो सजा दिया, उसका सम्मान करते हैं। आगे हायर कोर्ट में अपील करेंगे। ‘हम सभी को पुलिस में भर्ती कराना चाहते थे पापा’ गौरव के मुताबिक, पापा मुझे और तीनों बहनों को पुलिस में भर्ती कराना चाहते थे। पापा की 2007 में शादी हुई थी। शादी के बाद 2011 में मेरा जन्म हुआ। पापा और मम्मी ने मेरा नाम गौरव रखा। इसके बाद तीन बहने रौशनी, संध्या, साक्षी का जन्म हुआ। पापा कहते थे कि मैं अपने बेटे गौरव को गांव का गौरव बनाऊंगा। मेरा गौरव एक ना एक दिन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का अधिकारी बनेगा। वहीं, बहनों के बारे में पापा कहते थे कि तीनों बहनों को दरोगा बनाएंगे। खामस चौधरी की बचपन से ही पुलिस की वर्दी पहनने की इच्छा थी खामस चौधरी का जन्म मई 1976 को मधुबनी जिले के राहिका थाना क्षेत्र के मारर गांव में हुआ था। खामस चौधरी की बचपन से ही पुलिस की वर्दी पहनने की इच्छा थी। खामस ने 2009 में दरोगा की परीक्षा पास की और भागलपुर में ट्रेनिंग के बाद 2013 में जमुई में पोस्टिंग हुई। इसके बाद 2019 में उन्हें बेगूसराय भेजा गया, जहां उन्हें नगर थाना में एएसआई के तौर पर पोस्टिंग मिली। 2021 में खामस चौधरी को नावकोठी थाना भेजा गया। जानकारी के मुताबिक, अपने चारों बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए खामस चौधरी ने सिजौल स्थित अपने ससुराल में ही ससुर के घर से थोड़ी दूर पर घर बनवाया। इस घर में साल 2023 के मार्च महीने में गृह प्रवेश किया था। गृह प्रवेश के 9 महीने बाद ही खामस चौधरी शहीद हो गए थे। अब जानिए दिसंबर 2023 में खामस चौधरी के साथ क्या हुआ था घटना 19 दिसंबर 2023 की रात करीब 11:10 बजे की थी। नावकोठी के तात्कालीन थानाध्यक्ष परशुराम सिंह को गुप्त सूचना मिली कि पहसारा की ओर से एक सफेद रंग की ऑल्टो कार (BR09V-9810) भारी मात्रा में विदेशी शराब लेकर छतौना पुल होते हुए नीमाचांदपुरा की ओर जाने वाली है। सूचना मिलते ही पुलिस एक्टिव हो गई। थानाध्यक्ष ने तुरंत गश्ती दल के अधिकारी SI खामस चौधरी और उनके साथ मौजूद जवानों रौशन कुमार, बालेश्वर यादव और मो. मौजुद्दीन को छतौना पुल पर वाहन चेकिंग का निर्देश दिया। रात करीब 12:20 बजे का समय था। पुल के दक्षिणी छोर पर पुलिस टीम टॉर्च और लाइट जलाकर गाड़ियों की तलाशी ले रही थी। तभी पहसारा की ओर से तेज रफ्तार में वही सफेद ऑल्टो आती दिखी। पुलिस बल ने उसे रुकने का इशारा किया और अपनी पहचान दी। लेकिन कार सवारों ने कार रोकने के बजाय उसकी रफ्तार और बढ़ा दी और सीधे पुलिस टीम को निशाना बनाते हुए रफ्तार तेज कर दी। कार ने सबसे पहले SI खामस चौधरी को रौंदा। कार की टक्कर से खासम चौधरी हवा में करीब 5 फीट ऊपर उछल गए थे। पत्थर पर गिरे खामस चौधरी, घटनास्थल पर तोड़ा दम खामस चौधरी हवा में उछलने के बाद वे सीधे पुल के नीचे पत्थरों पर जा गिरे। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद तस्करों ने गाड़ी रोकने की कोशिश कर रहे सिपाही बालेश्वर यादव को भी रौंद दिया, जिससे वे लहूलुहान होकर बेहोश हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर गाड़ी समेत फरार हो गए। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष परशुराम सिंह अतिरिक्त बल के साथ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर बालेश्वर यादव बेसुध पड़े थे और खामश चौधरी का शव पुल के नीचे मिला। स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि इस रास्ते से शराब तस्करी का काला धंधा अक्सर होता है। थानाध्यक्ष परशुराम सिंह के बयान के आधार पर नीमा चांदपुरा थाना क्षेत्र के चांदपुरा गांव के कृष्ण कुमार, परना के मनीष कुमार एवं अझौर के रितेश कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया। 7 अप्रैल को कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया था अदालत ने नीमा चांदपुरा थाना क्षेत्र के अझौर गांव के रहने वाले आरोपी रितेश कुमार, पटना के रहने वाले मनीष कुमार और चांदपुरा के रहने वाले कृष्ण कुमार को 7 अप्रैल को दोषी ठहराया था। कोर्ट ने पुलिस अधिकारी की हत्या और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में तीनों को दोषी पाया था। अपर लोक अभियोजक (APP) विपिन राय ने बताया कि तीनों आरोपियों को धारा- 304 पार्ट-2 में 5-5 साल की सजा और 10-10 हजार जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर एक महीना अतिरिक्त जेल में रहना होगा।। थाना प्रभारी के बयान पर दर्ज हुई थी FIR इस मामले की प्राथमिकी नावकोठी थाना प्रभारी परशुराम सिंह के बयान पर दर्ज की गई थी। ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक विपिन राय ने मजबूती से पक्ष रखा। तीनों को धारा- 304 (2) में गैर इरादतन हत्या, धारा- 353 में सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य पालन से रोकने के लिए हमला और धारा- 323 के तहत स्वेच्छा से चोट पहुंचाने में दोषी पाया गया। दरोगा खामस चौधरी मधुबनी के रहने वाले थे। कोर्ट ने धारा- 353 में 2-2 साल का सश्रम कारावास और 5-5 हजार जुर्माना किया गया है। जुर्माना नहीं देने पर 2 महीने और जेल में रहना होगा। धारा-323 में 6 महीने का सश्रम कारावास और 500-500 जुर्माना किया गया है। जुर्माना नहीं देने पर 7 दिन और जेल में रहना होगा। तीनों सजा एक साथ चलेगी।
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